मोहित गिल्होत्रा, फाजिल्का : विधानसभा चुनाव को लेकर फाजिल्का हलके में भले ही अभी उम्मीदवारों को लेकर पिक्चर पूरी तरह से साफ नहीं हो सकी, लेकिन अबोहर में चारों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, शिअद, आप व भाजपा ने अपनी तस्वीर साफ कर दी है, जबकि फाजिल्का व जलालाबाद में अभी भी कांग्रेस सीट के लिए पेंच फंसा हुआ है।

भाजपा की ओर से वीरवार को जारी की गई पहली सूची में फाजिल्का से तीन बार विधायक रहे सुरजीत कुमार ज्याणी, अबोहर से मौजूदा विधायक अरूण नारंग च जलालाबाद से पूर्ण चंद को उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि बल्लूआना पर पेंच अभी भी फंसा हुआ है।

फाजिल्का के मौजूदा समीकरण की बात करें तो जहां फाजिल्का से पांच बार कांग्रेस और चार बार भाजपा उम्मीदवार जीत हासिल कर चुके हैं। तो वहीं अबोहर से सात बार कांग्रेस व तीन बार भाजपा जीत चुकी है। वहीं बल्लूआना में भी छह बार कांग्रेस और तीन बार शिअद उम्मीदवार जीत हासिल कर चुके हैं, जबकि जलालाबाद से चार बार कांग्रेस दो बार सीपीआई व चार बार शिअद जीत हासिल कर चुका है। पिछले चुनावों की बात करें तो जलालाबाद, फाजिलका व बल्लूआना सीट से कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, तो वहीं भाजपा के खाते में एक सीट आई। लेकिन इस बार सियासी समीकरण पिछले चुनाव से काफी अलग हैं, जहां भाजपा से अलग शिअद अपने उम्मीदवारों को यहां से उताकर अधिक से अधिक जीत हासिल करना चाहता है, तो वहीं कांग्रेस यहां से जीत के सिलसिले को जारी रखना चाहती है, जबकि भाजपा द्वारा भी मजबूत उम्मीदवारों को यहां से खड़ा करके जीत के दावे किए जा रहे हैं, जबकि इस बार आप पार्टी भी इन सीटों से अपना खाता खोलना चाहती है। ऐसे में भाजपा के तीन उम्मीदवारों की पिक्चर साफ होने से फिलहाल मुकाबला कड़ा दिख रहा है। लेकिन जलालाबाद व फाजिल्का सीट से कांग्रेस और बल्लूआना सीट से भाजपा अभी मंथन कर रही हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस व भाजपा कब तक इन सीटों से उम्मीदवारों को घोषित करती है। पिछले चुनाव में मात्र 265 वोटों से हारे थे सुरजीत ज्याणी

चुनाव दोनों भाजपा उम्मीदवारों की साख का सवाल है। क्योंकि भाजपा के सुरजीत ज्याणी ने जहां फाजिल्का को जिला बनाने के लिए अहम योगदान दिया और तीन बार यहां से विधायक रहे, लेकिन पिछले चुनाव में मात्र 265 वोटों से पीछे रहते हुए वह चुनाव हार गए। लेकिन भाजपा ने एक बार फिर से सुरजीत ज्याणी पर अपना विश्वास रखते हुए उन्हें टिकट थमाई है। जिससे अब यह सीट उनके लिए साख का सवाल बन गई है। नारंग की साख का सवाल बने चुनाव

1997 के बाद कांग्रेस की जीत का सिलसिला तोड़ने वाले अरुण नारंग पर भी भाजपा ने विश्वास जताते हुए टिकट थमाई है, जिससे यह सीट भी उनके लिए साख का सवाल है। लेकिन अबोहर में मुकाबला कड़े होने की उम्मीद है।

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