बिजली कटों से त्रस्त जनता, अकाली दल का सरहिंद में प्रदर्शन; सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सरहिंद में अकाली दल ने अघोषित बिजली कटों के खिलाफ धरना दिया। नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते ...और पढ़ें

अकाली दल के नेता प्रदर्शन करते हुए।
HighLights
पंजाब में बिजली संकट पर अकाली दल का प्रदर्शन।
सरहिंद में बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर नारेबाजी।
सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
दीपक सूद, फतेहगढ़ साहिब। पंजाब में बढ़ते बिजली संकट और लगातार लग रहे अघोषित कटों को लेकर सियासत तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल ने फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद में बिजली बोर्ड के कार्यालय के बाहर विशाल रोष धरना दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए और पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए अकाली दल के जिला देहाती प्रधान शरणजीत सिंह चनारथल और हल्का इंचार्ज बलजीत सिंह भुट्टा ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के समय लोगों को मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे-लंबे बिजली कटों के कारण आम जनता का जीवन बेहद कठिन हो गया है।
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बिजली कटों ने लोगों को परेशानी में डाला
नेताओं ने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली की कमी ने किसानों, व्यापारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानी में डाल दिया है। खेतों में सिंचाई प्रभावित हो रही है, छोटे व्यापार ठप हो रहे हैं और घरों में लोग गर्मी से बेहाल हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाती है।
अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने धरने के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि प्रदेश में बिजली की निर्बाध और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी अपने आंदोलन को और तेज करेगी और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
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घोषणाओं तक सीमित सरकार
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि बिजली व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
इस प्रदर्शन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिजली का मुद्दा पंजाब की राजनीति में एक बार फिर केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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