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हंसला नदी में गंदगी पर NGT का सख्त रुख; सरकार से मांगा जवाब, 17 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

Published: Mon, 30 Mar 2026 03:15 PM (IST)

हंसला नदी में बढ़ते प्रदूषण पर हरित न्यायाधिकरण सख्त हुआ। सरकार और अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया ...और पढ़ें

सोमवार 30 मार्च को हंसला नदी में एसटीपी से छोड़ा जा रहा असंशोधित सीवेज। - जागरण

सोमवार 30 मार्च को हंसला नदी में एसटीपी से छोड़ा जा रहा असंशोधित सीवेज। - जागरण

HighLights

  1. NGT ने हंसला नदी प्रदूषण पर पंजाब सरकार को नोटिस दिया।

  2. अनुपचारित सीवेज से नदी गंदे नाले में बदल गई है।

  3. 17 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, सरकार को देना होगा जवाब।

नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। हंसला नदी (सरहिंद चो) को बचाने की मुहिम तेज़ हो गई है। सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (NGT) ने पंजाब सरकार, जल संसाधन व स्थानीय निकाय विभाग, पीपीसीबी, स्वास्थ्य विभाग और फतेहगढ़ साहिब-मोहाली के डीसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सरहिंद नगर कौंसिल की लापरवाही से ऐतिहासिक प्राकृतिक जल धारा गंदे नाले में बदल रही है। असंशोधित सीवेज सीधे नदी में गिर रहा है। अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

दैनिक जागरण व पंजाबी जागरण ने ऐतिहासिक हंसला नदी (सरहिंद चो) को प्रदूषित कर गंदे नाले में तब्दील करने की लापरवाही का मुद्दा उठाया था। जिसमें बताया गया था कि ज़मीनी हकीकत कागज़ों से अलग है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व ड्रेनेज विभाग के नोटिस और जुर्माने के बावजूद एसटीपी से निकल रहा असंशोधित पानी हंसला में छोड़ा जा रहा है। दशहरा ग्राउंड के पास बने 5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी में उपचार का पुख्ता इंतज़ाम नहीं है।

‘परीक्षण संचालन’ की आड़ में प्राकृतिक जलस्रोत में गंदा पानी छोड़ना कानूनन अवैध है। किनारे पर बना अवैध गारबेज डंप पहले ही नुकसान कर चुका है।

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सुप्रीम कोर्ट की वकील ने जनहित याचिका दायर की

जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट की वकील सुनैना थम्मन ने एक जनहित याचिका नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल की थी। एनजीटी ने याचिका स्वीकार करने के बाद सोमवार 30 मार्च को इस पर पहली सुनवाई की। सोमवार सुबह हुई वर्चुअल सुनवाई में याचिकाकर्ता एडवोकेट सुनैना थम्मन ने खुद पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि हंसला नदी में लगातार प्रदूषण से भू-जल खराब हो रहा है, जन-स्वास्थ्य पर खतरा है और जलीय जीवन को नुकसान पहुंच रहा है। सरहिंद व हंसला नदी का ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व है, प्रदूषण से इसकी पर्यावरणीय गरिमा भी आहत हो रही है।

उनका कहना है कि यह स्थिति अनुच्छेद 21, जल अधिनियम 1974, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ठोस अपशिष्ट नियम 2016 का उल्लंघन है। सीपीसीबी/पीपीसीबी के मानक और एनजीटी के आदेश भी नहीं माने जा रहे। अकेले सरहिंद-फतेहगढ़ साहिब से रोज़ औसतन 7 एमएलडी असंशोधित सीवेज निकलता है। मोहाली से भी सीवेज इसमें डाला जा रहा है।

अगली सुनवाई में जवाब करना होगा दाखिल

एनजीटी ने पटीशनर इन पर्सन का पक्ष सुनने और जागरण में प्रकाशित समाचारों व तथ्यों का संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार के प्रमुख सचिव, प्रधान सचिव (ड्रेनेज, सिंचाई एवं जल संसाधन), निदेशक स्थानीय निकाय, पीपीसीबी, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा फतेहगढ़ साहिब व मोहाली दोनों जिलों के डीसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

बेंच ने स्पष्ट किया कि ‘परीक्षण संचालन’ की आड़ में प्राकृतिक जलस्रोत में असंशोधित सीवेज छोड़ना अवैध है। अब प्रशासन को ठोस योजना देनी होगी जिसमें एसटीपी को पूरी क्षमता व मानकों पर चलाना, अवैध पाइपलाइनें हटाना, डिसिल्टिंग, बफर ज़ोन, कचरा प्रबंधन और स्वतंत्र निगरानी के पुख्ता प्रबंधों का ब्लूप्रिंट देना होगा। 17 जुलाई से पहले जवाब दाखिल करना है। हंसला को बचाना पर्यावरण ही नहीं, जन-स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के अधिकार का प्रश्न है।

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इस उपचार के बाद ही की जा सकती है जल निकासी

प्रदूषण नियंत्रण के मानक तय हैं। उपचार के बाद ही जल निकासी की जा सकती है। सामान्य मानक के अनुसार बीओडी 10 मिग्रा/ली से कम, सीओडी 50 मिग्रा/ली, टीएसएस 20 मिग्रा/ली, फीकल कोलीफॉर्म 100 एमपीएन/100 मिली से नीचे होना चाहिए। इनसे अधिक प्रदूषक वाला पानी जलस्रोत में नहीं छोड़ा जा सकता। उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, जिम्मेदार एजेंसियों पर कार्रवाई और संयंत्रों को मानकों पर लाना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता की प्रमुख मांगें

* हंसला में असंशोधित/आंशिक उपचारित सीवेज की निकासी तुरंत बंद हो।
* सभी अवैध पाइपलाइनों की पहचान कर सीलिंग के बाद हटाया जाये।
* एसटीपी को पूर्ण क्षमता व मानकों पर चलाकर ही डिस्चार्ज की अनुमति हो।
* समयबद्ध रिवर रेजुवनेशन प्लान बना डिसिल्टिंग, प्रवाह बहाली व बफर ज़ोन निर्धारित किया जाए।
* भू-जल व स्वास्थ्य प्रभाव का स्वतंत्र आकलन तथा प्रभावितों की जांच हो।
* प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पर जिम्मेदार एजेंसियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की जाये।
* सरहिंद के ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व के मद्देनज़र पर्यावरणीय गरिमा की रक्षा हो।

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