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पंजाब में फिर एक होंगे पुराने साथी! बीजेपी की 'चुप' और अकाली दल के 'मौन' से मिले नए गठबंधन के संकेत

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:35 PM (IST)

फतेहगढ़ साहिब में नशा मुक्त यात्रा को लेकर भाजपा की गोपनीयता और अकाली दल की रैलियों में भाजपा पर साधे ...और पढ़ें

भाजपा की सरहिंद में मंगलवार को हुई बैठक में मौजूद पार्टी की सीनियर लीडरशिप और  सवाल पूछे जाने पर सुखबीर चुप हो गए।

भाजपा की सरहिंद में मंगलवार को हुई बैठक में मौजूद पार्टी की सीनियर लीडरशिप और सवाल पूछे जाने पर सुखबीर चुप हो गए।

HighLights

  1. भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' पर मीडिया से असामान्य चुप्पी।

  2. सुखबीर बादल ने भाजपा पर हमला करने से परहेज किया।

  3. सरहिंद में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी।

नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर दो पुराने सहयोगियों के मिलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरहिंद में बीजेपी की मैराथन बैठकों के बाद उभरी रहस्यमयी चुप्पी और सुखबीर सिंह बादल के बदले हुए सुरों ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। एक ही दिन, एक ही शहर और दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के रुख ने गठबंधन की अटकलों को फिर से हवा दे दी है।

भारतीय जनता पार्टी 18 सितंबर से राज्य में 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का आगाज करने जा रही है, जिसका दूसरा चरण 19 सितंबर को एतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब (फतेहगढ़ साहिब) से शुरू होगा। यात्रा का पहला चरण जहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुआई में शुरू हो रहा है, वहीं दूसरे चरण की कमान संभालने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहुंच रही हैं और समापन गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होना तय है।

लेकिन, इस पूरे भव्य खाके के बीच असली सुगबुगाहट भाजपा की उस 'असामान्य गोपनीयता' को लेकर है, जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस यात्रा के दूसरे चरण को लेकर बना रखी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज एक रणनीतिक चुप्पी है, या फिर सरहिंद की सरजमीं पर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के पुराने रिश्तों की जमी बर्फ पिघलने लगी है?

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वरिष्ठ नेताओं ने साधी मीडिया से चुप्पी

फतेहगढ़ साहिब की धरती पर इस दूसरे चरण की रूपरेखा तय करने के लिए रविवार और मंगलवार को पार्टी की दो मैराथन बैठकें हुईं। बैठकों का महत्व इसी बात से आंका जा सकता है कि रविवार को पंजाब भाजपा के संगठन मंत्री श्रीनिवासुलू ने कमान संभाली, तो मंगलवार को खुद प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया और संगठन मंत्री श्रीनिवासुलू सरहिंद पहुंचे।

लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पूरी सीनियर लीडरशिप ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। न तो यात्रा की कोई विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक की गई और न ही किसी वरिष्ठ नेता ने मीडिया के सामने आकर बात रखी। चुनावी सीजन की शुरूआत से ठीक पहले ऐसे व्यवहार को सामान्य नहीं आंका जा सकता।

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भाजपा की रणनीति पर सियासी सवाल बरकरार

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब यह सवाल तेजी से कौंध रहा है कि आखिर इस विशाल आयोजन के दूसरे चरण को इस कदर 'गुप्त' रखने के पीछे क्या वजह हो सकती है? क्या यह भाजपा की किसी नई रणनीति का हिस्सा है, या फिर जिला भाजपा में उत्साह की कमी है, जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है?

सियासी गलियारों में उठ रही चर्चाओं पर गौर करें तो इस पूरी चुप्पी के तार शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के संभावित पुनर्मिलन की अटकलों से जोड़कर देखे जा रहे हैं। जब-जब अकाली दल और भाजपा का पुराना गठबंधन रहा है, तब-तब फतेहगढ़ साहिब जिले की तीनों विधानसभा सीटें अकाली दल के ही खाते में रही हैं।

दोनों दलों की गतिविधियों से सियासी हलचल

इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट मंगलवार को देखने को मिला। जिस दिन पंजाब भाजपा के अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी और संगठन मंत्री सरहिंद में रणनीति गढ़ रहे थे, उसी दिन अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी 'पंजाब बचाओ रैली' के लिये यहां मौजूद थे। मंच से बोलते हुए सुखबीर बादल ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर तो तीखे शाब्दिक बाण चलाए, लेकिन भाजपा को लेकर पूरी तरह मौन साधे रखा।

रैली के बाद जब उनसे भाजपा से गठबंधन की संभावनाओं पर सवाल पूछा, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से परहेज किया। एक ही समय पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व का एक ही स्थान पर होना, भाजपा की ओर से मीडिया से दूरी बनाना और अकाली दल का भाजपा के प्रति नरमी दिखाना, यह महज एक इत्तेफाक है या पंजाब की सियासत में किसी बड़े बदलाव की आहट, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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