सिद्धू मूसेवाला की हत्या को तीन साल, मुख्य आरोपी गोल्डी बराड़ अभी भी फरार; परिवार और फैंस को न्याय का इंतजार
पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या को तीन साल हो गए हैं लेकिन परिवार और प्रशंसक अभी भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। 29 मई 2022 को मानसा जिले में उनकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई को मुख्य आरोपी बनाया है। विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या का बदला लेने के लिए मूसेवाला की हत्या की साजिश रची गई थी।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाबी गायक शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या को तीन साल पूरे हो गए। लेकिन परिवार और उनके फैंस अभी भी न्याय की आस में बैठे है। बता दें कि सिद्धू मूसेवाला की 29 मई, 2022 को पंजाब के मानसा जिले के जवाहर गांव में छह हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
लेकिन वह आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा है। पंजाब पुलिस ने मूसेवाला की हत्या के लिए कनाडा में गैंगस्टर से आतंकी बने गोल्डी बराड़ और इस समय गुजरात की जेल में बंद गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई को मुख्य आरोपित बनाया है। इस मामले में गाेल्डी बराड को सहित कई अन्य आरोपित अभी फरार है।
विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या का बदला लेने को रची गई साजिश
पंजाब पुलिस की चार्जशीट के अनुसार कनाडा में रहने वाला कुख्यात अपराधी गोल्डी बराड़ हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था। उसी ने हत्या के लिए गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और कुछ अन्य लोगों की मदद ली थी। मूसेवाला पंजाब पुलिस ने इस मामले में मानसा की एक अदालत में 24 आरोपियों के खिलाफ 26 अगस्त को पहली चार्जशीट दायर की थी।
पुलिस ने 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी लेकिन चार्जशीट 24 लोगों के खिलाफ दायर की है। जिसमें जगरुप सिंह रुपा और मनप्रीत खोसा उर्फ मनु को पुलिस ने एनकांउटर में मार गिराया था और दो गोइंदवाल में मनदीप तुफान व मनमोहन मोहना अपसी लड़ाई के मारे गए थे।
पुलिस ने इस मामले में कुल 215 लोगो को गवाह बनाया गया है। मामले में मुदई पक्ष की ओर से घटना के समय उसके साथ थार में मौजूद सिद्धू के दो दोस्तों गुरविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह की गवाही मुकम्मल हो चुकी है,जबकि सिद्धू के पिता बलकौर सिंह और सुखपाल सिंह की गवाही को लेकर अदालत की ओर से 4 जुलाई को सुनवाई मुकर्रर की गई है।
इसमें लारेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और गोल्डी बराड़ के नाम हैं। चार्जशीट के अनुसार बराड़ ने युवा अकाली नेता विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या का बदला लेने के लिए मूसेवाला की हत्या की साजिश रची थी। मिड्डूखेड़ा की 2021 में मोहाली में हत्या कर दी गई थी।
इस हत्या में मूसेवाला के मैनेजर बताए जाने वाले शगुनप्रीत सिंह का नाम आया था। मूसेवाला को मारने की साजिश में बराड़ ने आरोपितों लारेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया, सचिन भिवानी, अनमोल बिश्नोई, सचिन थापन, मोनू डागर, पवन बिश्नोई और शूटरों के साथ तालमेल कर हथियार, पैसा, कार, फोन, सिमकार्ड और अन्य आरोपियों के ठहरने का बंदोबस्त किया था।
हत्या से पहले 27 मई 2022 को भी मारने की थी कोशिश
29 मई को हत्या से पहले 27 मई को मूसेवाला के घर के आगे खड़े गोल्डी के गुर्गों ने आरोपियों को सूचना दी कि सिद्धू की गाड़ी मानसा के बाजार की तरफ चली गई है। इसके बाद आरोपी मनप्रीत, जगरूप, फौजी और कशिश बलेरो गाड़ी में सिद्धू का पीछा किया।
इसी दौरान फौजी ने अंकित को फोन किया कि उनकी गाड़ी पीछे रह गई, उन्हें साथ लेकर जाएं। लेकिन सभी आरोपी आपस में बिछड़ गए जिस कारण उस दिन हत्या की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद सभी आरोपी फतेहाबाद चले गए थे और आल्टो गाड़ी में सवार दीपक मुंडी एवं निक्कू अपने उकलाने वाले कमरे में चले गए थे। 28 मई को विदेश में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने फौजी को फोन कर सूचना दी कि सिद्धू की सुरक्षा वापिस ले ली गई है, तुम कल जल्दी मानसा पहुंच जाना तुम्हें वहां पर मनप्रीत एवं जगरूप मिलेंगे।
29 मई को सभी आरोपी बलेरो गाड़ी पर शाम करीब साढ़े चार बजे मानसा सरदूलगढ़ रोड पर बने होटल में पहुंच गए, जहां पर चाय पानी पीने के बाद फौजी ने केशव को आल्टो कार दे दी और फौजी, कशिश, अंकित और दीपक मुंडी बलेरो गाड़ी लेकर मूसा गांव की तरफ चल दिए।
फौजी ने केशव को कहा था कि तुम आल्टो कार लेकर वहीं रुको अगर काम हो गया तो वहीं पर वापस आ जाएंगे। इसके बाद केशव आल्टो कार लेकर झुनीर की तरफ चला गया था। करीब डेढ़ घंटे बाद केशव के पास फौजी का फोन आया कि उन्होंने काम कर दिया है, वे वापिस आ रहे हैं।
मूसेवाला सहित 424 लोगों की हटा दी थी सुरक्षा
चार्जशीट में कहा गया है कि उसने हमलावरों को 28 मई को मूसेवाला की सुरक्षा वापस लिए जाने की खबर दी थी और 29 मई को उनकी हत्या करने को कहा था। पंजाब पुलिस ने मूसेवाला समेत 424 लोगों की सुरक्षा अस्थायी आधार पर हटा दी थी।
इन को हुई एक मामले में सजा
मूसेवाला हत्याकांड में पुलिस हिरासत से फरार होने के मामले में गैंगस्टर दीपक टीनू को दो साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना और सीआईए स्टाफ के बर्खास्त इंचार्ज प्रीतपाल सिंह को एक साल 11 महीने की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
वहीं इस आरोपी आठ लोगों को बरी कर दिया है। टीनू एक अक्तूबर 2020 को सीआईए स्टाफ की पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। इस घटना के बाद डीजीपी पंजाब ने सीआईए स्टाफ इंचार्ज प्रितपाल सिंह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पुलिस के मुताबिक इस मामले में बिट्टू से एक अवैध पिस्टल, चिराग से दो और प्रितपाल सिंह की रिहायश से तीन पिस्टल बरामद किए गए थे।
पुलिस ने दीपक टीनू के पुलिस हिरासत से फरार करने में उसकी मदद के आरोप में उसकी महिला मित्र जितेंद्र ज्योति, दीपक टीनू के भाई चिराग, कुलदीप कोहली, बिट्टू, राजिंदर गोरा, सुनील लोहिया, सर्वजोत सिंह व राजवीर सिंह को नामजद किया गया था, जिन्हें बरी कर दिया गया है।

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