इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और पार्टी में इन दिनों कोई बचा पुल दिखाई नहीं पड़ रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू के प्रधान बनने से पहले यह काम मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पॅलिटिकल सेक्रेटरी कैप्टन संदीप संधू कर रहे थे। वह पार्टी दफ्तर के भी प्रभारी थे और मुख्यमंत्री दफ्तर में भी बैठते थे। यह पुल तो तभी चरमराने लगा था जब दाखा विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए कैप्टन संदीप को टिकट मिल गया। वह चुनाव तो हार गए, लेकिन 2022 के लिए तैयारियां वह अभी से कर रहे हैं। ऐसे में अब उन्होंने सीएमओ में बैठना भी कम कर दिया है, लेकिन अब नवजोत सिद्धू के प्रधान बनने के बाद उनका वर्चस्व पार्टी आफिस से भी चला गया है। ऐसे में अब पार्टी और सरकार के बीच कोई राजनीतिक व्यक्ति पुल के रूप में नहीं है। इस कारण राजनीतिक लोगों को सीएम से मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है।

शिकार को घेरा आप ने, दबोच ले गए बीर दविंदर

नौसिखिए और अनुभवी विधायकों में क्या अंतर होता है , यह जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स की 31 एकड़ जमीन वाले मामले में देखने को मिला है। आप के विधायक लगातार यह मुद्दा उठाते रहे कि 31 एकड़ जमीन को कौड़ियों के भाव में उद्योग मंत्री सुंदर श्याम अरोड़ा ने बेचा है। इस मामले को लेकर वे राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पास भी गए। अच्छा खासा दबाव सरकार पर बना दिया, लेकिन अनुभवी खिलाड़ी बीर दविंदर सिंह ने लोकपाल के पास अरोड़ा की शिकायत करके सारा क्रेडिट ले लिया। उनकी शिकायत और रिकार्ड के आधार पर ही लोकपाल ने मंत्री व अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अब जब तक लोकपाल के पास इसकी सुनवाई होती रहेगी, बीर दविंदर सिंह तब तब चर्चा में आते रहेंगे। अरोड़ा से पहले खुद कैप्टन अमरिंदर भी बीर दविंदर के इन्हीं पैंतरों का शिकार हो चुके हैं।

आप एक नहीं, दो लीजिए...

कांग्रेस में चल रहे घमासान में विधायकों की चांदी हो गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू ज्यादा से ज्यादा विधायकों को अपने पाले में दिखाना चाहते हैं। इसका कई विधायक फायदा भी उठा रहे हैं। पायल के विधायक लखबीर सिंह लक्खा के हलके में दो स्टेडियम बनने का काम काफी दिन से रुका हुआ था। विभाग की शर्त के मुताबिक दोनों गांवों की आठ-आठ एकड़ जमीन भी उन्होंने खेल विभाग के नाम पर कर दी थी, लेकिन स्टेडियम नहीं मिला। जब वह इसकी शिकायत लेकर सीएमओ पहुंचे तो उन्होंने कैप्टन के सीपीएस सुरेश कुमार से कहा कि वह कम से कम एक तो बनवा दें। सुरेश कुमार ने कहा, जब जमीन दो गांव की दी है तो स्टेडियम एक क्यों , आपको दो स्टेडियम मिलेंगे। अब विधायक जी के पांव जमीन पर न लग रहे। बस फिर क्या था, एक के बाद एक कई काम की सूची उन्होंने थमा दी।

किस्सा कुर्सी का

स्टेज पर बैठने की नेताओं में कितनी हाय तौबा मची रहती है, यह किसी से छिपा नहीं है। बैठने के लिए वह एक-दूसरे को नीचा दिखाने से भी नहीं कतराते। पिछले दिनों ऐसा ही शिरोमणि अकाली दल की प्रेस कांफ्रेस में हुआ। मंच पर दल से गठबंधन करने वाली पार्टियों के नेता के लिए कुर्सी लगाई गईं। दल के नेताओं को यह गवारा न हुआ। पूर्व विधायक रंजीत सिंह तलवंडी ने अपने लिए मंच पर ही कुर्सी लगा ली। कई पूर्व विधायक नीचे खड़े थे। जैसे ही प्रोग्राम समाप्त हुआ तो पूर्व विधायक जगदीश सिंह गरचा ने तलवंडी के ऐसा करने पर एतराज किया। गरचा ने तलवंडी को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि आपको अनुशासन में रहना नहीं आता। तलवंडी हाथ जोड़ते रहे और गरचा के तेवर बढ़ते गए। ऐसे में तलवंडी हाथ जोड़ते हुए क्लब से निकल गए और दल के कई लोगों ने गरचा को शांत किया।

Edited By: Kamlesh Bhatt