भाखड़ा और पोंग बांध में बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई तीन राज्यों की चिंता, हरियाणा-पंजाब और राजस्थान में बाढ़ का खतरा
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के भाखड़ा और पोंग बांधों में जलस्तर ऐतिहासिक रूप से बढ़ गया है जिससे हरियाणा पंजाब और राजस्थान के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। फतेहाबाद और सिरसा जिलों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जलभराव से सिंचाई के लिए पानी तो मिलेगा लेकिन धान की फसल डूबने का खतरा भी है। बीबीएमबी पानी की निकासी धीरे-धीरे कर रही है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के भाखड़ा और पोंग बांध का जलस्तर इस समय अब तक के सबसे ऊंचे जलस्तर पर पहुंच गया है। इससे पंजाब के साथ-साथ हरियाणा और राजस्थान के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
वीरवार को भाखड़ा बांध का स्तर 1672 फीट और पोंग बांध का स्तर 1393 फीट दर्ज किया गया। इस मानसून सीजन (जुलाई-अगस्त) में पोंग बांध में 9.68 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी आया है, जो परियोजना की स्थापना के बाद अब तक का सर्वाधिक है।
यह 1988 (7.70 बीसीएम) और 2023 (9.19 बीसीएम) जैसे बाढ़ वर्षों से भी अधिक है बांधों में रिकार्ड जलभराव के कारण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के निचले क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट पर है। स्थिति को देखते हुए हरियाणा सरकार ने फतेहाबाद और सिरसा जिलों में निगरानी बढ़ा दी है।
वहीं, पंजाब में फिरोजपुर, कपूरथला, होशियारपुर और ब्यास नदी किनारे के गांव प्रभावित हो सकते हैं। सतलुज के जरिए छोड़ा गया पानी हनुमानगढ़ व गंगानगर तक असर डाल सकता है। बीबीएमबी ने केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा वर्ष 2024 में तैयार रूल कर्व को इस साल से लागू किया है।
जल निकासी और संचालन संबंधी फैसले बीबीएमबी की तकनीकी समिति लेती है, जिसमें बीबीएमबी के वरिष्ठ अधिकारी, भागीदार राज्यों के मुख्य अभियंता, केंद्रीय जल आयोग और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के प्रतिनिधि शामिल हैं। पहली अगस्त से अब तक समिति सात बार बैठक कर चुकी है और हर निर्णय पारदर्शिता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर सर्वसम्मति से लिया गया है
किसानों के लिए राहत के साथ चुनौती
यह जलभराव सर्दियों की फसल (गेहूं) के लिए सिंचाई का पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएगा। हालांकि नदी किनारे खड़ी धान की फसल के डूबने और नुकसान की आशंका भी है। बीबीएमबी अधिकारियों का कहना है कि पानी की निकासी धीरे-धीरे और नियंत्रित ढंग से की जा रही है। उद्देश्य यह है कि बांध सुरक्षित रहें और नीचे बसे गांवों व खेतों पर कम से कम असर हो।
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