पायलेट प्रोजेक्ट ही सिरे नहीं चढ़ा पाए अफसर, चंडीगढ़ में 24x7 पेयजलापूर्ति अब सपना बनकर रह जाएगा
चंडीगढ़ में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 24x7 पेयजलापूर्ति परियोजना रद होने की कगार पर है। मनीमाजरा में पायलट प्रोजेक्ट की विफलता और वित्तीय बोझ के कारण नगर निगम इसे पूरे शहर में लागू नहीं करेगा। अधिकारियों ने डीपीआर में कमियां बताई हैं जिससे फ्रांस की एजेंसी को अवगत कराया गया है। एजेंसी के जवाब के बाद परियोजना को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

बलवान करिवाल, चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पूरे शहर को 24×7 पेयजलापूर्ति मुहैया कराने की जो परियोजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। अब उसे खारिज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मनीमाजरा में इस परियोजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, लेकिन उद्घाटन के एक वर्ष बाद भी सफल नहीं हुआ है।
पायलेट प्रोजेक्ट की असफलता और वित्तीय बोझ जैसे कई अहम कारणों को देखते हुए नगर निगम ने इस परियोजना को आगे पूरे शहर में लागू नहीं करने की योजना बना ली है। निगम अधिकारी भी इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में खामियां गिना चुके हैं। फ्रांस की एजेंसी को भी डीपीआर की इन खामियों से अवगत करवा दिया गया है।
एजेंसी की तरफ से भेजे गए जवाब से भी निगम अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। जिसके बाद इसे खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इतना ही नहीं इसे मंगलवार को आयोजित हुई निगम सदन की बैठक में ही खारिज किए जाने का प्रस्ताव लाया जाना था।
टेबल एजेंडा भाजपा पार्षदों के हस्ताक्षर के बाद तैयार भी हो गया था। भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा से चर्चा के बाद यह प्रस्ताव लाया जा रहा था। लेकिन किन्हीं कारणों से प्रस्ताव को लाया नहीं गया। अब आगे इसे कभी भी खारिज करने पर निर्णय लिया जा सकता है।
भाजपा नेता पहले ही इस प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर खारिज करने की मांग उठा चुके हैं। उनकी शिकायतों के बाद मनीमाजरा पायलट प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच तक चल रही है।
पैन सिटी 24×7 जलापूर्ति परियोजना इन कारणों से होगी रद्द
-चार अगस्त 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मनीमाजरा में 24×7 पेयजल आपूर्ति पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था। एक वर्ष बाद भी इस प्रोजेक्ट की दिक्कतें खत्म नहीं हो रही। एक वर्ष बाद भी किसी जोन में 24×7 प्रैशर से जलापूर्ति नहीं हो पाई है। अधिकारियों का मानना है कि घरों तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं, स्थानीय निवासियों ने गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की, जो पीने और दैनिक उपयोग के लायक नहीं है। इस पर भाजपा नेताओं और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद परियोजना की विजिलेंस जांच भी शुरू कर दी गई है।
-शहर के पार्षदों, राजनीतिक नेताओं और निवासियों का कहना है कि वे वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था से संतुष्ट हैं। उनकी मांग है कि नई परियोजना शुरू करने के बजाय मौजूदा सिस्टम में सुधार पर ध्यान दिया जाए।
-परियोजना की कुल लागत लगभग 510 करोड़ रुपये है, जिसमें से 412 करोड़ रुपये फ्रांस की एजेंसी एजेंस फ्रांसेज डी डेवलपमेंट (एएफडी) से लिया गया लोन है, जिसे 15 वर्षों में चुकाना होगा। इसके लिए नगर निगम को हर साल लगभग 40 करोड़ रुपये चुकाने होंगे, जो केवल पानी के बिल बढ़ाकर ही संभव है। लागू होने पर पानी के टैरीफ लगभग दोगुने हो जाएंगे, जिससे सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ पड़ेगा।
-अधिकारियों का कहना है कि यह 412 करोड़ का लोन वर्ष 2022 की पूंजी और संचालन लागत के आधार पर तय किया गया था। जब तक परियोजना पूरी तरह शुरू होगी, महंगाई के चलते वास्तविक लागत लगभग दोगुनी हो सकती है। इसलिए डीपीआर का कोई आधार नहीं रहेगा।
-प्रोजेक्ट की वर्ष 2019 में जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मनीमाजरा और पूरे शहर के लिए तैयार की गई थी, उसे तैयार करते समय जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में नहीं रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पायलट प्रोजेक्ट से सीखे गए सबक को पैन-सिटी डीपीआर में शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन उसकी डीपीआर पहले ही तैयार कर ली गई।
-डीपीआर ने वित्तीय दायित्वों को भी नजरअंदाज किया। उदाहरण के लिए अगर पूरे शहर में अंडरग्राउंड पाइपलाइन बदली जाती है, तो उससे जुड़ी टूटी सड़कों के दोबारा निर्माण की लागत सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकती है। इस भारी-भरकम खर्च को कौन वहन करेगा, इसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है।
रिपोर्ट बलवान करिवाल
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।