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    पीजीआइ में नई तकनीक से ब्रेन ट्यूमर की 45 लोगों की सफल सर्जरी

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 08 Jun 2021 08:38 AM (IST)

    ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के क्षेत्र में पीजीआइ लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। ऑर्बिटल रिम स्पेयरिग सिगल-पीस फ्रंटो ऑर्बिटल कीहोल नई तकनीक के जरिए अब तक 45 मरीजों की ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी कर चुका है।

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    पीजीआइ में नई तकनीक से ब्रेन ट्यूमर की 45 लोगों की सफल सर्जरी

    विशाल पाठक, चंडीगढ़

    ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के क्षेत्र में पीजीआइ लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। ऑर्बिटल रिम स्पेयरिग सिगल-पीस फ्रंटो ऑर्बिटल कीहोल नई तकनीक के जरिए अब तक 45 मरीजों की ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी कर चुका है। सर्जरी की इस नई तकनीक से मौत का खतरा 95 फीसद तक टल गया है। पीजीआइ के एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जन डा. एसएस ढांडापानी ने इस नई ब्रेन सर्जरी तकनीक को इजाद किया है। आज व‌र्ल्ड ब्रेन ट्यूमर-डे पर उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी में भी पीजीआइ में रोजाना एक से दो लोगों की ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हो रही है। महामारी से पहले पीजीआइ में रोजाना होती थी चार से पांच सर्जरी

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    डा. ढांडापानी ने बताया कि पीजीआइ में कोरोना महामारी से पहले रोजाना न्यूरोसर्जन इस प्रकार की ब्रेन ट्यूमर की चार से पांच मरीजों की सर्जरी करते थे। महामारी में भी पीजीआइ ने 120 से अधिक लोगों की सर्जरी की है। आंखों या मस्तिष्क पर नहीं होती अब कोई सूजन

    न्यूरोसर्जन ढांडापानी ने बताया कि इस नई तकनीक के जरिए ब्रेन सर्जरी करने से आंखों पर सूजन की समस्या खत्म हो गई है। अकसर ब्रेन सर्जरी के दौरान सिर यानी खोपड़ी के एक बड़े हिस्से को खोलना पड़ता था। पिछले कुछ वर्षो से अब खोपड़ी के आधार पर तकनीक का उपयोग करके ब्रेन ट्यूमर और एन्यूरिज्म का इलाज किया जा रहा है। वर्तमान में ब्रेन सर्जरी के दो प्रमुख प्रकार हैं। पहली प्रकार की ब्रेन सर्जरी में ब्रेन यानी खोपड़ी की व्यापक हड्डी ड्रिलिग के जरिए सर्जरी की जाती है। इससे जटिल न्यूरोसर्जरी के लिए मुश्किल हो जाता है। दूसरे प्रकार के लिए आंखों पर बोनी रिम को काटने की आवश्यकता होती है। इससे आंखों की सूजन और कॉस्मेटिक समस्याएं होती हैं। उन्होंने अब ऑर्बिटल रिम स्पेयरिग सिगल-पीस फ्रंटो-ऑर्बिटल कीहोल पेश किया है। जिसका उपयोग जटिल खोपड़ी आधार सर्जरी में भी किया जा सकता है। 16 महीने के बच्चे की थी सर्जरी

    डा. ढांडापानी ने बताया कि इस नई तकनीक के जरिए उन्होंने कुछ महीने पहले ही पूरी दुनिया में इस प्रकार पहली सर्जरी की थी। यह न्यूरोलॉजी इंडिया में आधिकारिक लेख के रूप में प्रकाशित किया गया है। जो न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक पत्रिका है। एंडोस्कोप और नेविगेशन के साथ उपयोग की जाने वाली ऐसी उन्नत तकनीक न्यूरोसर्जरी को और भी अधिक बढ़ा देती है। पीजीआइ को जल्द मिलेगा न्यूरोसाइंस ब्लॉक

    पीजीआइ में 3802 स्क्वेयर मीटर एरिया में एडवांस न्यूरोसाइंस ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण कार्य इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। न्यूरोसाइंस ब्लॉक पर 495 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पीजीआइ चंडीगढ़ के गोल मार्केट एरिया में न्यूरोसाइंस ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। पीजीआइ प्रवक्ता के मुताबिक इस ब्लॉक में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट को शिफ्ट किया जाएगा। न्यूरोसाइंस ब्लॉक में न्यूरोसर्जरी से जुड़े पेशेंट्स को एडमिट, इलाज और सर्जरी की जाएगी। यह पूरे उत्तर भारत में अलग प्रकार का न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में ऐसा ब्लॉक होगा। जहां मेडिकल स्टूडेंट्स को केस स्टडी, रिसर्च और न्यूरो मरीजों के इलाज के लिए सभी हाइटेक तकनीक उपलब्ध होगी।