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    रंजीत गिल को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, अदालत ने पंजाब सरकार को भेजा नोटिस

    Updated: Thu, 07 Aug 2025 05:50 PM (IST)

    खरड़ के रियल एस्टेट व्यवसायी रंजीत सिंह गिल ने गिरफ्तारी के डर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है लेकिन तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। गिल ने विजिलेंस ब्यूरो पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है उनका कहना है कि बीजेपी में शामिल होते ही उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई।

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    रंजीत सिंह गिल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। खरड़ स्थित रियल एस्टेट कारोबारी रंजीत सिंह गिल ने पंजाब पुलिस द्वारा संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। वीरवार को हाईकोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए 12 अगस्त तक जवाब दायर करने का आदेश दिया।

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    कोर्ट ने गिल को तुरंत राहत देने से भी इनकार कर दिया। बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आराधना सावनी की एकल पीठ ने मामला चीफ जस्टिस को भेज दिया था , ताकि उचित पीठ के समक्ष इस पर विचार किया जा सके। दरअसल, पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि यह मामला पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया द्वारा दायर एक लंबित याचिका से जुड़ा हुआ है और पूर्व व वर्तमान सांसदों/विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई एक अलग पीठ कर रही है।

    अपनी याचिका में गिल ने दावा किया है कि उन्हें पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 1 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होते ही उन पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार के इशारे पर विजिलेंस विभाग ने बिना किसी समन, नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के छिपे तौर पर तलाशी वारंट हासिल कर लिए। याचिका में यह भी बताया गया कि 2 अगस्त को विजिलेंस ब्यूरो ने उनके चार परिसरों पर छापे मारे, जिनमें उनका निवास भी शामिल था, लेकिन किसी भी आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी नहीं हुई।

    इसके बावजूद अब उन्हें भारत नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 179 के तहत गवाह के तौर पर समन भेजे गए हैं। (यह धारा पुराने सीआरपीसी की धारा 160 के समकक्ष है।) गिल के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता किसी भी प्राथमिकी में नामित नहीं हैं और न ही उनके खिलाफ कोई साक्ष्य या खुलासा हुआ है। साथ ही, चूंकि वह कोई सार्वजनिक पदाधिकारी नहीं हैं, इसलिए विजिलेंस ब्यूरो का क्षेत्राधिकार भी उन पर लागू नहीं होता।

    उन्होंने पूरी कार्रवाई को एक सोची-समझी साजिश, प्रक्रिया का दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जो उनके संविधान प्रदत्त राजनीतिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(ग)) के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। गौरतलब है कि 1 अगस्त को गिल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास पर बुलाई गई एक त्वरित बैठक में बीजेपी की सदस्यता ली थी। इसके ठीक अगले दिन उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई।