चन्नी-वड़िंग को साथ लाना आसान नहीं! परगट सिंह के सामने 4 बड़ी चुनौतियां; क्या पंजाब कांग्रेस को बना पाएंगे विनिंग टीम?
पंजाब कांग्रेस ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और विधायक परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके सामने ...और पढ़ें

पंजाब कांग्रेर के नए अध्यक्ष परगट सिंह। फाइल फोटो
HighLights
परगट सिंह पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद मिली कमान।
पार्टी में गुटबाजी खत्म कर एकजुटता लाना मुख्य चुनौती।
डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस की कमान अब पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह के हाथों में है। कांग्रेस ने शुक्रवार को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब 2027 विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं और पार्टी लंबे समय से अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है।
परगट सिंह भले ही अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले नाम नहीं थे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत यही मानी जा सकती है कि वे पिछले महीनों की गुटबाजी के केंद्र में नहीं रहे। पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान के रूप में उनकी राष्ट्रीय पहचान, खेल से जुड़ी उपलब्धियां और पंजाब की राजनीति में अपेक्षाकृत विवादमुक्त छवि उन्हें सभी धड़ों के बीच संवाद कायम करने के लिए अलग स्थिति में रखती है।
चन्नी और वड़िंग खेमे की दूरी खत्म करने की चुनौती
परगट सिंह के सामने सबसे कठिन काम कांग्रेस के भीतर बने गुटों को एक मंच पर लाना होगा। पिछले महीनों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। कांग्रेस हाईकमान ने भी नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने दोनों खेमों को साथ लाने की जरूरत को प्रमुख चुनौती माना था।
अब सवाल यह है कि परगट सिंह चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं को किस तरह साथ लेकर चलेंगे। खासकर उन नेताओं को साधना आसान नहीं होगा, जिन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के लिए हाईकमान पर दबाव बनाया था। उन्हें यह भरोसा भी दिलाना होगा कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन में उनकी भूमिका कमजोर नहीं होगी।
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वड़िंग को साथ रखना भी बड़ी परीक्षा
सिंह के सामने दूसरी चुनौती राजा वड़िंग की होगी। वड़िंग ने राहुल गांधी से मुलाकात कर औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपा और कहा कि उन्होंने खुद इस्तीफा दिया है। ऐसे में परगट सिंह के लिए जरूरी होगा कि संगठन में वड़िंग और उनके समर्थकों को अलग-थलग होने से बचाया जाए।
तीन महीने में संगठन और चुनावी तैयारी परगट सिंह के सामने समय भी सबसे बड़ी चुनौती है। उन्हें बूथ स्तर तक संगठन सक्रिय करने, टिकट के दावेदारों के बीच संतुलन बनाने, युवाओं को जोड़ने और कांग्रेस के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने का काम तेजी से करना होगा।
हॉकी के मैदान में टीम को साथ लेकर खेलने वाले परगट सिंह अब उसी अनुभव को राजनीति में कितना लागू कर पाते हैं, यही सबसे बड़ा सवाल है। उनकी असली परीक्षा अध्यक्ष बनने की नहीं, बल्कि बिखरी हुई पंजाब कांग्रेस को एक टीम में बदलने की होगी।
