'पहले लोग चुनते थे सरकार, अब ये तय कर रहे कि कौन वोट डालेगा', SIR मुद्दे पर मुख्यमंत्री मान ने केंद्र को घेरा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में मतदाता सूची पुनरीक्षण और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सदन में बोलते हुए सीएम भगवंत मान।
HighLights
मान ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।
लोकतंत्र बचाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में अब एक नई व्यवस्था देखने को मिल रही है, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए तानाशाह बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं की वोट ही काट दी जाए और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर न मिले तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है।
बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर के संविधान का हवाला देते हुए मान ने कहा कि वोट का अधिकार ही नहीं बचेगा तो संविधान की भावना कहां रह जाएगी।मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों में वोट काटने और नए वोट बनाने के आरोप लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की आशंका पैदा होती है। लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
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रिक्शा यूनियन तक होता है बैठकों का रिकॉर्ड
भगवंत मान ने चुनाव आयोग की बैठकों का रिकॉर्ड रखने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग कह रहा है कि आगे से बैठकों के मिनट्स तैयार किए जाएंगे और उनका रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सवाल यह है कि पहले बैठकों का रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा जाता था? मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में रिक्शा यूनियन और ट्रक यूनियन तक अपनी बैठकों का रिकॉर्ड रखती हैं, लेकिन देश के चुनावों की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठना गंभीर बात है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास व्यापक अधिकार हैं। चुनाव के दौरान शिकायतों और एफआईआर से जुड़े प्रावधानों का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ गलत होता है तो वह शिकायत कहां करे। मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसी परिस्थितियां लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को कमजोर करती हैं।
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ताश में पत्ता छिपाकर खेलने जैसा है वोटों का खेल
मुख्यमंत्री ने सदन में ताश के खेल का उदाहरण देकर अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी हारने लगता है और नियमों के विरुद्ध पत्ता छिपाकर खेलता है तो खेल की निष्पक्षता खत्म हो जाती है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की तुलना इसी तरह के खेल से करते हुए कहा कि चुनाव में भी नियमों और पारदर्शिता का पालन होना चाहिए।
चुनावी मशीनों की निष्पक्षता पर सवाल
मान ने ईवीएम पर उठने वाले सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि जब राजनीतिक दल चुनावी मशीनों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं तो इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने गुजरात चुनाव का उदाहरण देते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी के बावजूद भाजपा की जीत का जिक्र किया और चुनावी नतीजों को लेकर अपने सवाल रखे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची से वोट काटने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दों को गंभीरता से लेना जरूरी है। लोकतंत्र में हर नागरिक की वोट की अहमियत है और चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कायम रहना चाहिए।
