पंजाब में सीवर सफाई बनी जानलेवा, साढ़े पांच साल में 12 सफाईकर्मियों की मौत; देशभर में 332 ने गंवाई जान
पंजाब में 2021 से जून 2026 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान 12 सफाईकर्मियों की मौत हुई। देशभर में 332 मौतें दर्ज हुईं।

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HighLights
पंजाब में साढ़े पांच साल में 12 सफाईकर्मियों की जान गई।
देशभर में सीवर सफाई के दौरान 332 मौतें दर्ज हुईं।
सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मौतों का प्रमुख कारण बना।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के खतरनाक काम के दौरान पंजाब में पिछले साढ़े पांच वर्षों में 12 सफाईकर्मियों की मौत हुई है। लोकसभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन मौतों को सीधे तौर पर मैनुअल स्कैवेंजिंग के कारण हुई मौत नहीं माना गया है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2021 से 30 जून 2026 तक देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान 332 सफाईकर्मियों की जान गई। देश में सबसे अधिक 58 मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं। इसके बाद हरियाणा में 47, तमिलनाडु में 38, उत्तर प्रदेश में 37, दिल्ली में 29, गुजरात में 27 और राजस्थान में 23 मौतें दर्ज की गई हैं।
पंजाब में 12 मौतों के अलावा कर्नाटक में 12, तेलंगाना में 9, आंध्र प्रदेश में 5, दादरा एवं नगर हवेली में 3, बिहार और ओडिशा में 2-2 तथा गोवा और झारखंड में एक-एक मौत हुई है।
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पंजाब में 231 मैनुअल स्कैवेंजर चिन्हित
मंत्रालय के अनुसार 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों में देशभर में 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर चिन्हित किए गए थे। इनमें पंजाब के 231 लोग शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में देश के सभी जिलों में नया सर्वेक्षण भी कराया गया, लेकिन सरकार ने जवाब में बताया कि उसमें कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला।
मैनुअल स्कैवेंजर्स और उनके आश्रितों को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र ने कौशल विकास प्रशिक्षण और पूंजीगत सब्सिडी का प्रविधान किया है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पंजाब में किसी भी मैनुअल स्कैवेंजर को कौशल विकास प्रशिक्षण नहीं दिया गया, जबकि केवल पांच को पूंजीगत सब्सिडी मिली।
सुरक्षा उपायों के बावजूद हो रही मौतें
मंत्रालय ने बताया कि सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान हुई कुछ मौतों का कारण सुरक्षा सावधानियों का पालन नहीं किया जाना है। इसके लिए मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013, नियमों और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया में निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का पालन जरूरी है।
केंद्र ने जुलाई 2023 में राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र अभियान (नमस्ते) शुरू किया है। इसके तहत देशभर में 89,915 सीवर और सेप्टिक टैंक सफाईकर्मियों का सत्यापन किया गया है।
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सुरक्षा नियम सख्त, उल्लंघन पर सजा
सफाईकर्मियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, सुरक्षा प्रशिक्षण, आपात प्रतिक्रिया इकाइयों से जुड़े सुरक्षा उपकरण, स्वच्छता मशीनरी के लिए अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी, स्वास्थ्य बीमा और खतरनाक सफाई रोकने संबंधी कार्यशालाओं का प्रविधान किया गया है।
कानून के तहत बिना जरूरी सुरक्षा व्यवस्था के सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई कराना प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वाले को पांच वर्ष तक की कैद या पांच लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। केंद्र ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत भी सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में यंत्रीकरण बढ़ाने तथा खतरनाक तरीके से सीवर में प्रवेश को खत्म करने पर जोर दिया है।
