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नहीं टूट रही पंजाब में मेडिकल नशे की सप्लाई चेन! 20 करोड़ की दवाएं जब्त और 520 लाइसेंस रद

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:00 AM (IST)

पंजाब में 20 करोड़ से अधिक की मेडिकल दवाएं जब्त होने और 520 लाइसेंस सस्पेंड होने के बावजूद नशे की ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. पंजाब में मेडिकल नशे की सप्लाई चेन तोड़ना बड़ी चुनौती।

  2. 20 करोड़ से अधिक की दवाएं जब्त, 520 लाइसेंस निलंबित।

  3. भ्रष्टाचार, लंबित मामले और हत्याएं बढ़ा रहीं समस्या।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में मेडिकल नशे का कारोबार रोकने की बड़ी चुनौती केवल दवाएं पकड़ना नहीं, बल्कि उस सप्लाई चेन को तोड़ना है, जो इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को नशे के बाजार तक पहुंचाती है। हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग के साथ अब ऐसी गोलियां और कैप्सूल भी चिंता का कारण हैं, जिनका वैध उपयोग इलाज में होता है, लेकिन दुरुपयोग नशे के लिए किया जा रहा है।

पंजाब के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 तक 16,788 निरीक्षण किए गए। इस दौरान 214 लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से 20.64 करोड़ रुपये से अधिक की दवाएं जब्त हुईं। 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित और 22 के रद्द किए गए। 54 अदालती मामले शुरू हुए, जबकि 35 मामलों में दोषसिद्धि और जुर्माने की कार्रवाई हुई। जिला अदालतों में 650 मामले लंबित हैं।

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सप्लाई चेन तोड़ना क्यों मुश्किल?

हर आदत डालने वाली दवा NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं है और अलग-अलग दवाओं पर नियम भी अलग हो सकते हैं। दवा बरामद होने के बाद उसके स्रोत, खरीद-बिक्री के रिकार्ड और आगे सप्लाई करने वालों को जोड़कर सबूत जुटाना जरूरी है। दूसरे राज्यों से आने वाली खेप और आनलाइन बिक्री की निगरानी भी चुनौती है।

राज्य के सेहत मंत्री डा बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्र के सामने शेड्यूल एच ड्रग्स में कई दवाओं को शामिल करने के साथ-साथ ई-फार्मेसी के नियमन का मुद्दा उठाया है और अपने स्तर पर आठ तरह के दवा फार्मूलेशन के स्टाक और बिक्री पर पाबंदियां लगाई हैं। इसी प्रयास का नतीजा है कि नशे के लिए इस्तेमाल हो रहे प्रेगाबालिन को ड्रग्स रूल्स के शेड्यूल एच1 में शामिल करने की अधिसूचना 12 नवंबर 2026 से लागू होनी है।

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विभागीय भ्रष्टाचार की सच्चाई

54 अदालती मामलों और 35 मामलों में दोषसिद्धि या जुर्माने के आंकड़ों से सटीक कन्विक्शन रेट नहीं निकाला जा सकता। यह स्पष्ट नहीं है कि दोषसिद्धि वाले मामले उन्हीं 54 मामलों में शामिल हैं या पहले दर्ज हुए मामलों से जुड़े हैं। यह भी साफ नहीं कि लंबित 650 मामलों में सभी मेडिकल दवाओं से संबंधित हैं। सही आकलन के लिए आरोपपत्र, बरी हुए आरोपितों और जांच या सबूतों की कमी वाले मामलों के अलग आंकड़े जरूरी हैं।

बिल, स्टाक रजिस्टर, बैच नंबर और परिवहन का रिकार्ड सप्लाई चेन साबित करने में अहम हैं। उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि हर मामले में कन्विक्शन कम होने की वजह यही है।

सितंबर 2024 में पंजाब पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने ड्रग इंस्पेक्टर शिशन मित्तल को मोहाली के एयरोसिटी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आरोप था कि वह अवैध फार्मास्यूटिकल दवाओं, मेडिकल स्टोरों और नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क की मदद कर रहा था।

पुलिस ने उससे जुड़े 24 बैंक खातों में 7.09 करोड़ रुपये फ्रीज करने, दो लाकर जब्त करने और छापों में नकदी, सोना व विदेशी मुद्रा मिलने की जानकारी दी थी। आरोप जांच का विषय हैं; गिरफ्तारी दोषसिद्धि नहीं है।

ड्रग अधिकारी की हत्या

ड्रग अधिकारी नेहा शौरी की 29 मार्च 2019 को खरड़ स्थित कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अक्टूबर 2026 में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की मानसा में गोली मारकर हत्या हुई। वह मेडिकल स्टोरों पर कथित नशीली दवाओं की बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन इन्होंने अवैध बिक्री पर निगरानी और नशे के खिलाफ काम करने वालों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।


अब कार्रवाई की कसौटी केवल जब्त दवाओं और निलंबित लाइसेंसों की संख्या नहीं, बल्कि बड़े सप्लायरों तक जांच की पहुंच, दोषियों को मिली सजा और स्थायी रूप से तोड़ी गई सप्लाई चेन होगी। इसके लिए मेडिकल नशे के मामलों, दोषसिद्धि, बरी होने और लंबित मुकदमों के अलग आंकड़े सार्वजनिक करना जरूरी है।

दवाओं का सही प्रयोग हो, ये सरकार की जिम्मेदारी

पठानकोट से भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने कहा कि दवाओं के लिए नियम पूरे देश में एक जैसे हैं तो पंजाब में दवाओं को नशे के रूप में इस्तेमाल होने की जिम्मेदारी भी पंजाब सरकार, पंजाब के सेहत विभाग, ड्रग इंस्पेक्टरों की है। यह पंजाब सरकार का जिम्मा है कि वह दवाओं की बिक्री पर निगरानी रखे और नियमों का उल्लंघन करके दवाएं बेचने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करे कि फिर से कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।

दवाएं उपचार के लिए जरूरी हैं, इसलिए पंजाब सरकार को चाहिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ मरीज करें, न कि नशे की लत वाले। हर मामले में केंद्र सरकार को कोसना बंद करके पंजाब सरकार खुद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

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