Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Punjab News: गृह मंत्रालय ने की BJP नेताओं की सुरक्षा में कटौती, कांग्रेस छोड़ भाजपा में हुए थे शामिल

    By Rohit KumarEdited By: Himani Sharma
    Updated: Sat, 14 Oct 2023 02:00 PM (IST)

    Punjab News गृह मंत्रालय ने बीजेपी नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है। जानकारी के मुताबिक इन में से कई नेता वे है जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे। भाजपा के करीब 40 नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है। ध्यान रहे कि बीते साल राज्य सरकार की सुरक्षा में कटौती किए जाने के बाद कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को सुरक्षा दी गई थी।

    Hero Image
    गृह मंत्रालय ने की BJP नेताओं की सुरक्षा में कटौती

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। राज्य के भाजपा नेताओं की केंद्र सरकार ने सुरक्षा में कटौती की है। जानकारी के मुताबिक इन में से कई नेता वे है जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे। भाजपा के करीब 40 नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    ध्यान रहे कि बीते साल राज्य सरकार की सुरक्षा में कटौती किए जाने के बाद कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को सुरक्षा दी गई थी। लेकिन अब तकरीबन एक साल के बाद इन सुरक्षा वापस लेकर नई सुरक्षा दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद यह बदलाव किया गया है। नेताओं को अब वाई कैटेगरी की जगह एक्स सुरक्षा कर दी गई है।

    यह भी पढ़ें: नगर निगम चुनाव से पहले जालंधर में कांग्रेस को झटका, CM मान की अध्यक्षता में 10 पार्षदों ने थामा AAP का हाथ

    जानकारी सुरक्षा कारणों से नहीं की गई सांझा

    इस लिस्ट में कौन-कौन से नाम यह जानकारी सुरक्षा कारणों से सांझा नहीं की गई है। लेकिन सुरक्षा में बदलाव किया गया है। एक्स श्रेणी में दो सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा का कवच होता है। सिर्फ सशस्त्र पुलिस कर्मियों को ही शामिल किया जाता है। इस में कोई कमांडो नहीं होता। जबकि वाई श्रेणी की सुरक्षा में 1 या 2 कमांडो और पुलिस कर्मियों सहित आठ जवानों का सुरक्षा कवच होता है।

    यह भी पढ़ें: Punjab: CM मान की SYL पर खुली बहस की चुनौती पर जाखड़ का सुझाव, तीन सदस्‍यीय पैनल बनाने का रखा प्रस्‍ताव

    इन में सुरक्षा के तौर पर दो पर्सनल सिक्योरिटी अफसर भी तैनात किए जाते है। सुरक्षा कम क्यों की गई इस पर पंजाब पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि यह अधिकार केंद्र गृह मंत्रालय के अधीन होता है। एजेंसियों के इनपुट के आधार पर सुरक्षा कम और बढ़ाई जाती है। सुरक्षा को लेकर समय-समय पर रिव्यू होता रहता है।