29.27 लाख के मुआवजे में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, 50 प्रतिशत रिश्वत मांगने का आरोप; पंजाब सरकार से मांगा जवाब
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 29.27 लाख रुपये के मुआवजे में देरी और रिश्वत के आरोपों पर पंजाब सरकार से जवाब और अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा।

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
हाई कोर्ट ने मुआवजा देरी, रिश्वत आरोप पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा।
राजस्व अधिकारी पर 29.27 लाख मुआवजे में 50% रिश्वत मांगने का आरोप।
पंजाब सरकार को मुआवजे की पात्रता, देरी के कारणों पर रिपोर्ट दें।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत जमीन और ढांचे का मुआवजा जारी करने में देरी तथा एक राजस्व अधिकारी पर रिश्वत मांगने के आरोपों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को बताने का निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता और उनकी मां मुआवजे के हकदार हैं या नहीं और राशि रोके जाने के कानूनी व तथ्यात्मक कारण क्या हैं।
यदि वे पात्र हैं, अवार्ड अंतिम हो चुका है और उस पर कोई रोक नहीं है, तो राशि कानून के अनुसार बिना देरी जारी की जाए। जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ ने स्मित सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कुछ अधिकारियों पर रिश्वत मांगने और राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर के आरोप लगाए हैं।
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मुआवजे के बदले मांगी गई 50% रिश्वत
याचिकाकर्ता के वकीलों के अनुसार, स्मित सिंह 13 मरले जमीन और उस पर बने ढांचे के मालिकाना कब्जे में हैं। इस संपत्ति के लिए याचिकाकर्ता और उनकी मां के पक्ष में 13 जुलाई 2023 को जारी अवार्ड के तहत 29,27,228 रुपये का मुआवजा तय हुआ था। आरोप है कि उस समय जिला राजस्व अधिकारी और वर्तमान में फतेहगढ़ साहिब के एसडीएम बताए गए करुण गुप्ता ने मुआवजा जारी करने के बदले निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत रिश्वत मांगी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मांग पूरी नहीं करने पर 95 लोगों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समन भेजे गए, जबकि संबंधित रिकॉर्ड में ऐसी आपत्तियां नहीं थीं। इसके बाद 22 नवंबर 2024 को अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व)-सह-वित्तीय आयुक्त राजस्व को शिकायत दी गई।
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मामले की अगली सुनवाई अब 8 दिसंबर को
वकीलों ने अदालत को बताया कि 27 अगस्त 2025 की पंजाब के मुख्य सचिव की रिपोर्ट में शिकायत को गंभीर बताया गया था। रिपोर्ट में मुआवजा रोके जाने और अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) से विस्तृत रिपोर्ट लेकर उचित कार्रवाई करने को कहा गया था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, 6 सितंबर 2025 को उप जिला अटार्नी ने भी राय दी थी कि अवार्ड पर रोक न होने पर जमानती और क्षतिपूर्ति बांड के आधार पर मुआवजा जारी किया जा सकता है। हालांकि, राशि अब तक नहीं मिली। संपत्ति के हिस्सों और मालिकाना हक का विवाद जिला न्यायाधीश, फतेहगढ़ साहिब के समक्ष विचाराधीन है।
पंजाब सरकार ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। हाई कोर्ट ने मुआवजे की पात्रता, भुगतान रोकने के कारणों और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।
