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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में 9283 मुकदमों का बोझ घटा, अदालत ने सितंबर में 21 हजार से अधिक मामले निपटाए

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:11 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पिछले सवा तीन महीनों में 9,283 लंबित मुकदमों का बोझ कम किया है। मुख्य ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में सवा तीन महीने में 9,283 मुकदमों का बोझ घटा।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में सवा तीन महीने में 9,283 मुकदमों का बोझ घटा।

HighLights

  1. सवा तीन महीने में 9,283 लंबित मुकदमों में कमी।

  2. सितंबर में 21,644 मामलों का निपटारा, 121% दर।

  3. मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुधार।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या घटाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। करीब छह महीने तक मामलों की संख्या में खास बदलाव नहीं होने के बाद सवा तीन महीने में 9,283 मुकदमे कम हुए।

एक जुलाई को हाई कोर्ट में 4,13,500 मामले लंबित थे। 12 अक्टूबर तक यह संख्या घटकर 4,04,217 रह गई। इस अवधि में लंबित मामलों में लगभग 2.25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

सितंबर में 21 हजार से अधिका मामलों का निपटारा

सितंबर में हाई कोर्ट ने 21,644 मामलों का निपटारा किया, जबकि 17,871 नए मामले दायर हुए। यानी नए मामलों से 3,773 अधिक मुकदमों का फैसला हुआ और निपटारे की दर लगभग 121 प्रतिशत रही।

चालू वर्ष में यह दर 109 प्रतिशत तक पहुंची है, जबकि पिछले वर्ष 103 प्रतिशत थी। 100 प्रतिशत से अधिक निपटारे की दर का अर्थ है कि अदालत नए दर्ज मामलों से अधिक पुराने मुकदमों का निपटारा कर रही है।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर है। उन्होंने एक जून को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था और सितंबर में मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली थी। जिन मामलों की सुनवाई पहले साल में लगभग तीन बार होती थी, उन्हें अब महीने में तीन से अधिक बार सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी पक्षों के जवाब और जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर दो महीने के भीतर अंतिम फैसला देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

हाई कोर्ट में रोजाना लगभग छह हजार मामले सूचीबद्ध होते हैं। वर्ष 2000 तक के पुराने मामलों के अलावा वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं के खिलाफ अपराध, दिव्यांग व्यक्तियों, किशोरों और वंचित वर्गों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले, निचली अदालतों में स्थगित कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए रिमांड संबंधी मामले भी प्राथमिकता सूची में हैं। वर्ष 1995 तक के मामलों को तत्काल सुनवाई वाली सूची में रखा जा रहा है। 86 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के मामले भी तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाते हैं।

85 स्वीकृत पदों में 21 रिक्त

अगस्त में नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद भी 85 स्वीकृत पदों के मुकाबले 64 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। सात नाम पदोन्नति के लिए विचाराधीन हैं। इसी वर्ष तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की भी संभावना है।