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हरियाणा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को मिली मंजूरी, हाई कोर्ट ने HPSC की आंसर की को चुनौती देने वाली याचिकाएं की खारिज

Published: Wed, 14 Oct 2026 12:21 PM (IST)

हरियाणा हाई कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) भर्ती प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। अदालत ने स्क्रीनिंग परीक्षा की ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को दी हरी झंडी

  2. स्क्रीनिंग परीक्षा की उत्तर कुंजी बदलाव को चुनौती खारिज

  3. विशेषज्ञों की राय को अदालत ने दी प्राथमिकता

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) भर्ती प्रक्रिया को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने स्क्रीनिंग परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में बदलाव और कुछ प्रश्न हटाने के हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के फैसले को चुनौती देने वाली 16 याचिकाएं खारिज कर दीं।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विषय विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उत्तर कुंजी में स्पष्ट और निर्विवाद गलती साबित हुए बिना अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने आयोग की 27 जून 2025 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी, 3 जुलाई 2025 की घोषणा और 11 जुलाई 2025 को घोषित स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में छह प्रश्नों के जवाब बदले और 10 प्रश्न हटा दिए, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता और परिणाम की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिहार लोक सेवा आयोग की 29 अप्रैल 2025 को हुई असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) परीक्षा के 30 प्रश्न हरियाणा की परीक्षा में दोहराए गए थे।

उन्होंने कहा कि उत्तर कुंजी में बदलाव और प्रश्न हटाने से योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ। याचिकाकर्ताओं ने संशोधित उत्तर कुंजी, सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन और नई मेरिट सूची जारी करने की मांग की थी।

आयोग ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक उत्तर कुंजी पर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गई थीं। इन्हें विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया और उनकी सिफारिशों के आधार पर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार हुई। अभ्यर्थियों की शिकायतों की दोबारा समीक्षा भी विशेषज्ञों से कराई गई, लेकिन उत्तर कुंजी में बदलाव जरूरी नहीं पाया गया।

अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी और प्रश्नों की शैक्षणिक शुद्धता तय करना विशेषज्ञों का काम है। याचिकाकर्ता विशेषज्ञों की निष्पक्षता या उनके फैसले में दुर्भावना का ठोस प्रमाण नहीं दे सके।

पाठ्यपुस्तकों के आधार पर अलग-अलग जवाबों की तुलना कर विशेषज्ञों की राय बदलना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। बिहार की परीक्षा के प्रश्न दोहराए जाने भर से परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह नहीं किया जा सकता।