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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला, ACR से नहीं रुकेगा प्रमोशन; समीक्षा का आदेश

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:48 AM (IST)

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने माना कि कर्मचारी को पक्ष रखने का मौका दिए बिना औसत गोपनीय रिपोर्ट के ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. औसत ACR को सूचित करना अब अनिवार्य होगा।

  2. बिना सूचना ACR पर पदोन्नति रोकना अनुचित है।

  3. प्रभावित कर्मचारियों की पदोन्नति पर पुनर्विचार का आदेश।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी की ऐसी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR), जिसकी प्रतिकूल प्रविष्टि या श्रेणी उसके करियर और पदोन्नति को प्रभावित कर सकती है, उसे बताना जरूरी है। रिपोर्ट के खिलाफ पक्ष रखने का अवसर दिए बिना उसके आधार पर पदोन्नति से वंचित करना उचित नहीं है।

जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग से जुड़े चार मामलों का निपटारा करते हुए प्रभावित कर्मचारियों की पदोन्नति पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

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एसीआर के कारण रुकी पदोन्नति

याचिकाकर्ताओं ने फोरमैन इंस्ट्रक्टर पद पर पदोन्नति की मांग की थी। उनका कहना था कि निर्धारित योग्यता पूरी करने के बावजूद उनसे कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी गई। इनमें तेजा सिंह का मामला प्रमुख था। उन्हें 21 अगस्त 1977 को कपूरथला के जूनियर टेक्निकल स्कूल में वर्कशाप इंस्ट्रक्टर के पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था। उनकी सेवाएं एक अक्टूबर 1980 को नियमित हुईं।

वर्ष 1996 में फोरमैन इंस्ट्रक्टर के 26 पदों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति ने 28 पात्र कर्मचारियों का पैनल बनाया। तेजा सिंह का नाम 27वें स्थान पर था। निर्धारित मानक पूरा नहीं होने के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। इसकी वजह उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में दर्ज औसत श्रेणी थी।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि तत्कालीन निर्देशों के तहत केवल प्रतिकूल टिप्पणियों वाली गोपनीय रिपोर्ट कर्मचारियों को बताई जाती थी और औसत श्रेणी को प्रतिकूल प्रविष्टि (एंट्री) नहीं माना जाता था। विभाग के अनुसार, पदोन्नति के लिए पिछले पांच वर्षों की रिपोर्ट देखी गई थी। तेजा सिंह की तीन रिपोर्ट औसत और दो अच्छी श्रेणी की थीं, इसलिए वे निर्धारित अच्छे मानक पर खरे नहीं उतरे।

बाद में विभाग ने हलफनामे में औसत श्रेणी वाली रिपोर्ट कर्मचारियों को बताने और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने पर सहमति जताई। हाई कोर्ट ने विभाग के इस रुख को विरोधाभासी माना।

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पदोन्नति पर दोबारा विचार का आदेश

अदालत ने पदोन्नति पर प्रतिकूल असर डालने वाली औसत श्रेणी की रिपोर्टों को नजरअंदाज कर मामलों पर दोबारा विचार करने और नियमों के अनुसार पात्रता पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनकी पेंशन के काल्पनिक पुनर्निर्धारण पर भी विचार होगा। अदालत ने सीधे पदोन्नति देने के बजाय नियमानुसार पुनर्विचार का आदेश दिया है।

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