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यूएसए वीजा फर्जीवाड़ा केस में हाईकोर्ट सख्त; कहा- कस्टोडियल पूछताछ जरूरी, अग्रिम जमानत से इनकार

Published: Mon, 02 Feb 2026 05:40 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अमेरिकी दूतावास के ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र अपलोड कर वीजा हासिल कराने के ...और पढ़ें

एजेंट मिलकर अमेरिकी दूतावास के पोर्टल पर फर्जी जानकारियां और नकली दस्तावेज़ अपलोड कर रहे थे।

एजेंट मिलकर अमेरिकी दूतावास के पोर्टल पर फर्जी जानकारियां और नकली दस्तावेज़ अपलोड कर रहे थे।

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने फर्जी वीजा एजेंट को अग्रिम जमानत देने से मना किया।

  2. जांच के लिए कस्टोडियल पूछताछ को अदालत ने जरूरी बताया।

  3. फर्जीवाड़े से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ता है असर।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अमेरिकी दूतावास के ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र अपलोड कर वीजा हासिल कराने के गंभीर आरोपों में घिरे एजेंट को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच एजेंसी को कस्टोडियल इंटरोगेशन का अवसर नहीं दिया गया तो पूरी जांच बाधित हो जाएगी और अहम सबूत सामने नहीं आ पाएंगे।

यह आदेश जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने पारित किया। अदालत ने कहा कि अग्रिम ज़मानत कोई सामान्य अधिकार नहीं बल्कि एक असाधारण उपाय है, जिसे हर मामले में लागू नहीं किया जा सकता। मामला अमेरिकी दूतावास के ओवरसीज क्रिमिनल इन्वेस्टिगेटर की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ।

आरोप है कि पंजाब में सक्रिय वीजा एजेंट दीप्ति, लवदीप सिंह सोढ़ी और अन्य अज्ञात एजेंट मिलकर अमेरिकी दूतावास के पोर्टल पर फर्जी जानकारियां और नकली दस्तावेज अपलोड कर रहे थे।

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नॉन इमिग्रेंट वीजा के समय फर्जी डिग्री अपलोड की

जनवरी 2025 में सह-आरोपी लवप्रीत सिंह ने नॉन-इमिग्रेंट वीजा के लिए आवेदन करते समय ‘छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय’ के नाम से जारी बताई गई बीए डिग्री अपलोड की थी। बाद में उसने स्वीकार किया कि शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज फर्जी थे। अभियोजन का दावा है कि ये फर्जी दस्तावेज याचिकाकर्ता वीजा एजेंट ने ही उपलब्ध कराए थे।

अदालत ने कहा कि यदि कस्टोडियल इंटरोगेशन से वंचित किया गया तो जांच एजेंसी महत्वपूर्ण तथ्यों और सबूतों तक नहीं पहुंच पाएगी। इस तरह के मामलों में अग्रिम जमानत देने से पूरे नेटवर्क का खुलासा होना मुश्किल हो जाएगा। पंजाब सरकार की ओर से कहा कि यह साधारण अपराध नहीं है, बल्कि विदेशी दूतावास के साथ धोखाधड़ी है, जिससे भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में आरोपी की भूमिका बेहद गंभीर है और पूरे गिरोह का पर्दाफाश करना आवश्यक है।

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बचाव पक्ष की दलील- उन्हें फंसाया गया

याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि उसका इस अपराध से कोई संबंध नहीं है और उन्हें केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है, जो न तो विश्वसनीय है और न ही किसी ठोस साक्ष्य से समर्थित। हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और साफ़ कर दिया कि कस्टोडियल इंटरोगेशन इस मामले में अनिवार्य है।

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