पश्चिम एशिया तनाव से 55 हजार करोड़ का बासमती निर्यात प्रभावित, पंजाब हरियाणा पर बड़ा आर्थिक संकट
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से 55 हजार करोड़ का बासमती निर्यात प्रभावित हुआ है। पंजाब-हरियाणा पर सबसे ज्यादा असर ...और पढ़ें

धान की भरी बोरियों से भरा गोदाम। (फाइल फोटो)
HighLights
पश्चिम एशिया युद्ध से 55 हजार करोड़ का बासमती निर्यात प्रभावित।
पंजाब-हरियाणा के बासमती निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान।
ईरान-इजरायल तनाव से व्यापार मार्ग बाधित, लागत बढ़ी।
इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। पश्चिम एशिया में पिछले तीन साल से चल रहे युद्ध के चलते भारत से 55 हजार करोड़ रुपए की बासमती का निर्यात प्रभावित हो रहा है। सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा पर पड़ने की संभावना है जो 75 प्रतिशत बासमती अरब देशों को भेजते हैं जहां पर सबसे ज्यादा बासमती पैदा होती है।
अकेले पंजाब से ही 18 हजार करोड़ रुपए का बासमती साउदी अरब,इरान, यमन और दुबई आदि देशों में जाता है। लगातार दूसरे साल इरान और इजरायल के बीच युद्ध के कारण बासमती निर्यातकों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है और उनकी स्थिति दीवालिएपन पर भी पहुंच सकती है।
बासमती निर्यात एसोसिएशन के प्रधान अशोक सेठी ने कहा कि मौजूदा हालात से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बंदरगाहों पर माल अटका है और पिछले सालों का भुगतान भी अभी तक नहीं मिला। वर्ष 2025 में इजरायल-ईरान तनाव के समय भी ऐसी स्थिति बनी थी। रमजान में मांग बढ़ने से सुधार की उम्मीद थी, लेकिन संघर्ष यमन, दुबई और सऊदी अरब तक फैल गया।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव ने भी व्यापारिक रास्ते प्रभावित किए हैं। सेठी ने कहा कि निर्यातक असमंजस में हैं कि माल किस बाजार में भेजें, क्योंकि मार्ग बाधित हैं और जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
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सीआईएफ समझौतों पर संघ की चेतावनी
बीते कल भारतीय चावल निर्यातक संघ ने अपने सदस्यों को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और खाड़ी देशों के गंतव्यों के लिए नए ''लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ)'' समझौतों में प्रवेश करने से बचने की सलाह दी है और चेतावनी दी कि स्थिति शिपमेंट को बाधित कर सकती है और माल ढुलाई और बीमा लागत में भारी वृद्धि कर सकती है।
सीआईएफ समझौतों के तहत, विक्रेता जलमार्गों के माध्यम से माल परिवहन किए जाने के दौरान खरीदार के बंदरगाह तक पहुंचने तक की लागत, बीमा और भाड़ा वहन करते हैं।
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बासमती निर्यात घटा, पंजाब चिंतित
भारत ने 2024-25 के दौरान लगभग 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी मांग मुख्य रूप से मध्य पूर्व और पश्चिम एशियाई देशों से प्रेरित थी। उनके अलावा अन्य प्रमुख खरीदारों में इराक, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। भारत सरकार की कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास एजेंसी (अपिडा) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच मध्य पूर्वी देशों को बासमती चावल का निर्यात ₹27,197 करोड़ था, जिसमें मुख्य रूप से सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन शामिल हैं।
पंजाब को बासमती से नुकसान होने का एक असर राज्य की विविधिकरण को नुकसान होना भी है । धान की बजाए राज्य सरकार किसानों को बासमती के लिए प्रेरित करती है क्योंकि इसकी रोपाई 15 जुलाई तक हो सकती है और यह पकने में कम समय लेती है। साथ ही इसकी पराली भी पशुओं के चारे के रूप में काम आती है लेकिन जिस प्रकार से लगातार बासमती का निर्यात प्रभावित हो रहा है उससे किसानों में इसको पैदा करने का रूझान भी कम होगा।
