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    पंजाब ग्रामीण बैंक की ब्रांच से साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 300 फेक अकाउंट के जरिए रकम की हेराफेरी

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 07:00 AM (IST)

    कपूरथला में पंजाब ग्रामीण बैंक की शाखा में 300 फर्जी खाते खुलने का खुलासा हुआ है। साइबर ठगों ने इन खातों का इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ये खाते जनवरी से दिसंबर 2024 तक संचालित किए गए। स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का संदेह है।

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    पंजाब ग्रामीण बैंक की ब्रांच से साइबर ठगी का बड़ा खुलासा (जागरण फाइल फोटो)

    जागरण संवाददाता, मोहाली। कपूरथला में जालंधर रोड स्थित पंजाब ग्रामीण बैंक की एक ब्रांच में 300 फर्जी खाते खोले जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों ने म्यूल अकाउंट (अवैध धन को सफेद करने के लिए इस खाते का इस्तेमाल किया जाता है) बनाकर किया जिनसे ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाया गया।

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    यह बड़ा खुलासा दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय की एजेंसी से आइ रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक इन फर्जी खातों का संचालन किया गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात लोगों पर आइटी एक्ट व भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और एफआईआर की कापी कोर्ट सहित उच्च अधिकारियों को भेज दी है।

    बड़े पैमाने पर हुआ रकम का लेन-देन

    साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच से स्पष्ट है कि इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर रकम का लेन-देन हुआ। अब बैंक से विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है और टेक्निकल टीम की मदद से उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है, जो इस नेटवर्क को चला रहे थे।

    300 खाते एक ही ब्रांच में फर्जी तरीके से खुलना अपने आप में संगठित गैंग की ओर इशारा करता है। पुलिस को शक है कि इतनी बड़ी संख्या में खाते खोलना केवल बाहरी साइबर ठगों के बूते की बात नहीं हो सकती। बिना बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के यह खेल संभव नहीं दिखता।

    नियमों की हुई खुलेआम अनदेखी

    विशेषज्ञों का कहना है कि एक-दो खाते तो शायद जांच से बच सकते हैं, लेकिन पूरे सालभर में 300 खाते खोलकर लगातार एक्टिव रखना नियमों की खुलेआम अनदेखी का सबूत है। पुलिस अब उन कर्मचारियों की सूची खंगाल रही है, जो उस समय ब्रांच में तैनात थे और जिनकी आईडी से ये खाते खोले गए।