अमित शाह के जालंधर रैली को लेकर प्रताप बाजवा ने घेरी केंद्र सरकार, पूछा- सीमा पार से ड्रोन क्यों नहीं रुक रहे
अमित शाह की जालंधर रैली से पहले प्रताप बाजवा ने केंद्र से ड्रोन के जरिए नशा-हथियार तस्करी रोकने की कार्रवाई ...और पढ़ें
HighLights
बाजवा ने अमित शाह के जालंधर दौरे पर नशे पर सवाल उठाए।
सीमा पार ड्रोन से नशे, हथियारों पर कार्रवाई की मांग।
पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम और गिरफ्तारियों पर प्रश्न।
डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब में नशे के मुद्दे पर बुधवार को नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जालंधर दौरे को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार पर सवाल खड़े किए। अमित शाह बुधवार को भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन कार्यक्रम में जालंधर पहुंचे हैं।
चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस में बाजवा ने कहा कि पंजाब में नशे से युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है।
ऐसे में गृह मंत्री को जालंधर आने से पहले यह बताना चाहिए कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए आ रहे नशे और हथियारों को रोकने के लिए केंद्र ने अब तक क्या कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने सीमा क्षेत्र में अपने अधिकार क्षेत्र को 15 से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने की बात कही थी, लेकिन सीमावर्ती जिलों में नशे की सप्लाई अब भी जारी है।
बाजवा ने कहा कि पंजाब में नशे की सप्लाई लाइन आखिर क्यों नहीं टूट रही, सीमा से लगे करीब 550 किलोमीटर क्षेत्र में केंद्र और बीएसएफ ने अब तक क्या कार्रवाई की, इसका जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल लोकेशन और तकनीक के इस्तेमाल से तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
यह भी पढ़ें- 'पंजाब में 31 दिसंबर 2029 के बाद नहीं मिलेगा चिट्टा', जालंधर में नशे के खिलाफ अमित शाह की हुंकार
सरकार के दावों पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पंजाब सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें करीब 70 हजार नशा तस्करों की गिरफ्तारी की बात कही गई है। उन्होंने पूछा कि इन आरोपितों की कितनी संपत्तियां जब्त की गईं और कितने बड़े सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 500 दिन की नशा विरोधी मुहिम में 70 हजार गिरफ्तारियों का दावा किया था।
नशा और गैंगस्टरवाद बने चुनौती
बाजवा ने कहा कि पंजाब की जेलों की क्षमता और गिरफ्तारियों के आंकड़ों को लेकर भी सरकार को स्पष्टता देनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद पंजाब को नशा मुक्त करने का वादा किया था, लेकिन आज भी हालात गंभीर हैं।
बाजवा ने कहा कि वह खुद सीमावर्ती क्षेत्र से आते हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र में नशे से मौतों का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। बाजवा ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के 15 साल के दौर के बाद अब नशा और गैंगस्टरवाद बड़ी चुनौती हैं। नशे का असर पंजाब के खेलों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मिलकर काम करना चाहिए।
यह भी पढ़ें- CM मान से मुलाकात करना पड़ा भारी, अकाल तख्त ने SGPC के दो सदस्यों को थमाया नोटिस, बैठकों पर भी लगाई रोक
चुनाव से पहले यूनिवर्सिटी में ऐसे हालात ठीक नहीं
उन्होंने हाल में चितकारा विश्वविद्यालय और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुई घटनाओं को भी गंभीर बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले ऐसी घटनाओं की पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि इन घटनाओं में कौन शामिल है और पंजाब की अर्थव्यवस्था व शैक्षणिक संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
बाजवा ने कहा कि भाजपा को पंजाब में वोट मांगने से पहले अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए और बताना चाहिए कि केंद्र ने नशे तथा सीमावर्ती सुरक्षा के मोर्चे पर क्या हासिल किया है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा में घटनाओं पर भी बाजवा ने उठाए सवाल बाजवा ने प्रेस कांफ्रेंस में पंजाब की दो बड़ी निजी यूनिवर्सिटी—लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटीमें हाल की घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए।
निष्पक्ष जांच की मांग रखी
उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं और इनके पीछे कौन लोग शामिल हैं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बाजवा ने कहा कि ऐसी घटनाओं का सीधा असर पंजाब की शिक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने यूनिवर्सिटी में हुए नुकसान का जिक्र करते हुए सवाल किया कि करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
साथ ही उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी की घटना की भी पूरी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। बाजवा ने दोनों घटनाओं को पंजाब में कानून-व्यवस्था और युवाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।
