फर्जी ई-वीजा पर ब्रिटेन पहुंच गए पंजाबी, 14 लोगों को वापस लाने की तैयारी; पुलिस शुरू करेगी प्रत्यर्पण प्रक्रिया
फर्जी ई-वीजा के जरिए ब्रिटेन पहुंचे पंजाब के 14 लोगों को वापस लाने के लिए पंजाब पुलिस प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
फर्जी ई-वीजा पर ब्रिटेन पहुंचे 14 पंजाबियों के खिलाफ वारंट जारी।
पंजाब पुलिस गृह मंत्रालय के जरिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करेगी।
30 लोग जांच के घेरे में, एयरलाइन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। फर्जी ई-वीजा और रोजगार संबंधी दस्तावेजों के सहारे ब्रिटेन पहुंचे पंजाब के 14 लोगों को वापस लाने के लिए पंजाब पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआइटी) की रिपोर्ट के आधार पर सभी 14 के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। अब गृह मंत्रालय (एमएचए) को पत्र भेजकर ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
पुलिस ब्रिटेन से जांच में जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य हासिल करने के लिए म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस रिक्वेस्ट भी भेजेगी। मामला इस साल जनवरी में सामने आया था। एसआइटी की जांच के अनुसार पंजाब के रहने वाले 14 लोग 11 से 16 जनवरी के बीच अमृतसर से एयर इंडिया की उड़ानों एआइ-169 और एआइ-117 से लंदन पहुंचे थे।
आरोप है कि इन यात्रियों ने यात्रा के दौरान मोबाइल फोन में फर्जी ई-वीजा और रोजगार संबंधी दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट दिखाए थे। ब्रिटेन पहुंचने के बाद सभी ने वहां शरण मांगी।
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पहले पांच पकड़े गए, फिर नौ और ब्रिटेन रवाना
जांच के अनुसार पांच यात्री 11 जनवरी को अमृतसर से लंदन पहुंचे थे। ब्रिटेन पहुंचने के बाद उन्होंने शरण मांगी और ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया। उनके यात्रा दस्तावेजों की जांच में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद ब्रिटेन की ओर से एयर इंडिया और भारतीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।
इसके बावजूद 16 जनवरी को नौ अन्य यात्री कथित तौर पर इसी तरह के दस्तावेजों के साथ अमृतसर एयरपोर्ट से लंदन रवाना हो गए। इसके बाद एयर इंडिया और एयरपोर्ट की ग्राउंड हैंडलिंग व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई।
30 लोग जांच के घेरे में
एसआइटी की जांच में अब तक 30 लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। इनमें 14 यात्री, एयर इंडिया के तीन कर्मचारी, एयर इंडिया एयरपोर्ट सर्विसेज के चार कर्मचारी, कई ट्रैवल एजेंट और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि 14 में से 10 यात्रियों की टिकट बुकिंग में कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हुआ था।
पुलिस इसे यात्रियों की यात्रा व्यवस्था किसी एक व्यक्ति या संगठित नेटवर्क द्वारा कराए जाने के संकेत के तौर पर जांच रही है। एयरलाइन और ग्राउंड हैंडलिंग कर्मचारियों से जुड़े लैपटाप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजे गए हैं।
पुलिस को फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कर्मचारियों की कथित नेटवर्क में क्या भूमिका थी। उनके खिलाफ आगे वारंट जारी करने या अन्य कार्रवाई का फैसला भी रिपोर्ट के आधार पर होगा।
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मोहाली में दर्ज हुआ था केस
यह मामला अप्रैल में मोहाली में दर्ज किया गया था। केस गृह मंत्रालय और ब्रिटिश अधिकारियों से मिले इनपुट के आधार पर दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143(3), जो मानव तस्करी से संबंधित है, और पंजाब प्रिवेंशन आफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट, 2012 की धारा 13(1) के तहत कार्रवाई की गई है।
एसपी रिचा अग्निहोत्री की अगुआई में एसआइटी गठित कर जांच की गई थी। पुलिस अब ब्रिटेन से कानूनी सहयोग और साक्ष्य हासिल करने के साथ आरोपितों के खिलाफ चालान पेश करने की तैयारी कर रही है।
जांच का अहम पहलू यह भी है कि ब्रिटेन से पहली खेप के यात्रियों के दस्तावेजों पर सवाल उठने के बाद दूसरी खेप के नौ यात्री कथित रूप से उन्हीं तरह के दस्तावेजों के साथ अमृतसर एयरपोर्ट से कैसे रवाना हो गए।
