चंडीगढ़, [विशाल पाठक]। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में लोग घरों में बंद रहे। इस कारण उन्‍होंंने मोबाइल फोन और लैपटॉप का अत्‍यधिक इस्तेमाल किया। इस कारण काफी संख्‍या में लोग ड्राइ आइ सिंड्रोम के शिकार हो गए। मोबाइल और लैपटॉप के अधिक इस्‍तेमाल से ड्राइ आइ सिंड्रोम का खतरा बढ़ता है। टाइम पास करने के चक्कर में लोगों ने लॉकडाउन में मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी देख-देखकर लोगों ने आंखें खराब कर लीं। चंडीगढ़ में ड्राइ आइ सिंड्रोम के मरजी दोगुने हो गए।

आंखों की बीमारी जेरोऑप्थालमिया यानी आंखों में सूखेपन के मरीज आ रहे सामने

लॉकडाउन के दौरान आंखों की बीमारी जेरोऑप्थालमिया यानी आंखों में सूखेपन के मरीज कई गुना बढ़ गए हैं। इसके अलावा आंखों में थकान के मामले भी बढ़ गए। आंखों में नमी रखने वाले लुब्रिकेंट आइ ड्रॉप्स की सेल भी दोगुनी से भी अधिक हो गई है। चंडीगढ़ पीजीआइ के डायरेक्‍टर प्रोजेक्ट जगतराम और पूर्व सीनियर प्रोफेसर और चंडीगढ़ में कोर्निया सेंटर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अशोक शर्मा ने इस हालत को चिंताजनक बताया।

मोबाइल कंपनियों के आंकड़ों में खुलासा : लॉकडाउन में बढ़े डाटा यूजर्स

कंपनीज के डाटा इस्तेमाल के आंकड़े बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान लोगों में मोबाइल फोन की औसत स्क्रीन टाइम कई गुणा बढ़ी है। इसका नतीजा यह हुआ कि कई घंटे तक मोबाइल, कंप्यूटर स्क्रीन और टेलीविजन देखते रहने के कारण लोगों की आंखों में थकान और सूखेपन की बीमारी बढ़ गई।

प्रो. जगतराम                                                         डॉक्टर अशोक शर्मा

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मामले ज्‍यादा बढ़े

पीजीआइ के डायरेक्टर प्रो. जगतराम और पीजीआइ चंडीगढ़ के पूर्व सीनियर प्रोफेसर डॉक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि कंप्यूटर पर काम करते रहने वालों में सीवीएस यानी कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मामले पहले से ज्यादा देखने को मिले हैं। इस तरह आंखों में नमी की मात्रा कम हो जाने को मेडिकल भाषा में जेरोऑप्थालमिया कहा जाता है। प्राकृतिक तौर पर विटामिन ए की कमी से भी आंखों में नमी बनाए रखने वाले लेक्रिमल ग्लैंड ठीक से काम नहीं करते। जिसे जेरोऑप्थालमिया या ड्राइ आइ सिंड्रोम कहा जाता है।

लोगों ने दवाइयों का स्टॉक भी किया

डॉक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि पिछले साल 1 मई से 15 जून के दौरान उनके पास कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का मात्र एक केस आया था। यह इस साल लॉकडाउन पीरियड में बढ़कर 22 हो गए हैं। इसी तरह पिछले साल ड्राइ आइ सिंड्रोम के कुल 18 मरीज आए थे। इस साल संख्या बढ़कर 28 हो गई है। जाहिर है, लॉकडाउन में लगातार कई घंटों तक इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल फोन और टीवी देखते रहने के कारण रेडिएशन से आंखों की नमी कम हुई है।

उन्‍होंने बताया क‍ि आंखों में नमी बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले मिथाइल सेल्यूलोज आइ ड्रॉप्स की बिक्री में इजाफा हुआ है। सेक्टर-27 के गोसाईं मेडिकोज के मुताबिक लॉकडाउन में फंसे होने के कारण लोग ने दवाइयों का स्टॉक भी जमा किया। इससे भी पिछले समय के दौरान आइ ड्रॉप्स की सेल में बढ़ोतरी हुई है।

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