जेएनएन, चंडीगढ़। यह कैसी आजादी है? लोग डर कर जी रहे हैं। बेटी शाम को एक घंटा लेट आती है तो मां एक घंंटे में दर्जनों में कॉल कर देती है। हो सकता है वह अपने दोस्तों में हो, लेकिन भय का माहौल है। ऐसे में इसे क्या कहें, यह डर है या आजादी। कोई बोले न बोले सत्यार्थी तो जरूर बोलेगा।

लड़की के साथ दुष्कर्म होता है तो कहा जाता है कि लड़की की इज्जत लूटी गई, लेकिन असलियत में यह इज्जत लड़के की लुटती है। हमारी घटिया मानसिकता नहीं बदली। यह कहना है नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और पीयू की लाल बहादुर शास्त्री चेयर के प्रोफेसर कैलाश सत्यार्थी का।

वह गत दिवस पंजाब यूनिवर्सिटी में भारत यात्रा के दौरान चाइल्ड राइट्स पर लेक्चर देने पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले, नाबालिग विवाहिता के  साथ शारीरिक संबंध दुष्कर्म, को उन्होंने प्रशंसनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश की एक भी बेटी तकलीफ में होती है तो उन्हें चैन से नींद नहीं आती। उन्होंने कहा कि लोगों की मानसिकता बदले बिना दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन प्रताडऩा और हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्चों के  साथ घिनौना अपराध करने वाले 70 फीसद लोग परिवार के जानकार या परिचित ही होते हैं। दुनिया के लोग, संपदा और शांति खतरे में है। सत्यार्थी भारत यात्रा मुहिम में चाइल्ड राइट्स के लिए देश के 22 राज्यों में पैदल चलेंगे।

90 फीसद मामले लंबित

सत्यार्थी ने कहा कि बच्चों के साथ यौन प्रताडऩा के 90 फीसद मामले अभी तक कोर्ट में लंबित हैं। पिछले साल 15 हजार के स पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए। इनमें से चार फीसद का समाधान हुआ। छह फीसद एक्टिवेटिड हैं। जिस गति से मामलों का समाधान हो रहा है तो उससे न्याय मिलने में 58 साल लग जाएंगे।

हर घंटे दो बच्चों से कुकर्म, आठ का हो रहा अपहरण

नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा कि हर घंटे में दो बच्चों से कुकर्म या दुष्कर्म होता है, जबकि आठ का अपहरण हो रहा है। यूनिसेफ और भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार हर 100 बच्चों में से 53 के साथ किसी न किसी तरह का सेक्सुअल ह्रासमेंट या यौन हिंसा होती है।

कोटखाई की घटना ने नम की सबकी आंखें

सत्यार्थी ने कहा कि शिमला के कोटखाई में 14 साल की छात्रा से दुष्कर्म हुआ। उसके माता-पिता को मैंने अपने पास दिल्ली बुला लिया। पिता ने बताया कि उनकी बेटी आइएएस बनना चाहती थी, लेकिन उस दिन स्कूल जाकर वह वापस नहीं लौटी। जब उन्होंने यह बताया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।

परिजनों को उठानी होगी आवाज

चंडीगढ़ में 10 साल की दुष्कर्म पीडि़ता मामले पर सत्यार्थी ने कहा कि बच्ची के साथ दुष्कर्म उसके दो मामाओं ने ही किया, लेकिन सब कुछ छुपा कर रखा गया, ताकि झूठी मर्यादा बरकरार रहे। परिजनों को ऐसी चीजें बाहर लानी चाहिएं।

राम रहीम जैसों की जगह जेल में ही

राम रहीम पर खुलकर बोलते हुए सत्यार्थी ने कहा कि पाखंडी बाबाओं की जगह जेल में है। राम रहीम को इससे भी ज्यादा सजा मिलनी चाहिए। गरीब और डरे हुए लोगों का फायदा उठाते हैं। धार्मिक पाखंडियों से हमें बचना है। ये लोगों की भावनाओं से खेलते हैं और गलत काम करते हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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