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    पैरा ओलिपियन निषाद कुमार ने लगाया गोल्डन जंप

    डीएवी कॉलेज-10 के पूर्व छात्र व टोक्यो पैरा ओलिपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले हाई जंपर निषाद कुमार ने अपनी जीत की लय को बरकरार रखते हुए ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 20 वीं नेशनल पैरा एथलेट्कि्स में गोल्ड मेडल जीता है। हिमाचल की तरफ से खेलते हुए निषाद ने 2.05 मीटर ऊंची छलांग मारकर चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल किया।

    By JagranEdited By: Updated: Tue, 29 Mar 2022 08:57 PM (IST)
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    पैरा ओलिपियन निषाद कुमार ने लगाया गोल्डन जंप

    विकास शर्मा, चंडीगढ़

    डीएवी कॉलेज-10 के पूर्व छात्र व टोक्यो पैरा ओलिपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले हाई जंपर निषाद कुमार ने अपनी जीत की लय को बरकरार रखते हुए ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 20 वीं नेशनल पैरा एथलेट्कि्स में गोल्ड मेडल जीता है। हिमाचल की तरफ से खेलते हुए निषाद ने 2.05 मीटर ऊंची छलांग मारकर चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर हरियाणा के हाई जंपर रामपाल रहे।

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    निषाद मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के कटौहड कलां पंचायत के रहने वाले हैं। निषाद कुमार ने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम के कोच नसीम अहमद से कोचिग ली है। ऐसे में उनके कोच ने भी उन्हें इस जीत के लिए बधाई दी है। मां से मिला निषाद को जीत का जज्बा

    निषाद कुमार को जीता का जज्बा मां पुष्पा देवी से मिला है। पुष्पा देवी स्टेट स्तर की वॉलीबॉल व शॉटपुट की खिलाड़ी रह चुकी हैं। वर्ष 2008 में जब निषाद का हाथ कट गया था,तो उनकी मां ने ही उन्हें हौसला दिया था। उन्होंने कभी भी उन्हें कुछ भी करने से नहीं रोका। पिता ने भी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह दिव्यांग हो गए हैं। माता -पिता के इसी व्यवहार ने निषाद को मजबूत बनाया वह स्कूल व कॉलेज स्तर के मुकाबलों में सामान्य खिलाड़ियों के साथ खेलते रहे। इतना ही नहीं वर्ष 2018-19 पंजाब यूनिवर्सिटी इंटर कॉलेज प्रतियोगिता में भी उन्होंने सामान्य खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए सिल्वर मेडल जीता था। तब गोल्ड मेडल विजेता खिलाड़ी से निषाद ने सिर्फ दो सेंटीमीटर कम छलांग लगाई थी। निषाद कहते हैं कि अगर मैं अपनी दिव्यांगता या गरीबी के बारे में सोचता रहता तो यकीनन आज पैरा एथलीट न होता, न ही पैरा ओलिपिक में सिल्वर मेडल जीत पाता। निषाद बोले- हर जीत के साथ बढ़ता है मनोबल

    निषाद कुमार ने बताया कि टोक्यो पैरा ओलिपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद यह पहला बड़ा टूर्नामेंट था। जीत हर खिलाड़ी के लिए काफी अहम होती है। जीत से आपका मनोबल बढ़ता है और आप आने वाली प्रतियोगिताओं की जोश के साथ तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यही कोशिश रहेगी कि यह जीत का सिलसिला न टूटे और वह इसी तरह देश के लिए मेडल जीतते रहें।