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    चंडीगढ़ के 70 साल के मास्टर एथलीट हरिहर का कमाल, 42 किमी मैराथन में जीता गोल्ड मेडल

    चंडीगढ़ के हरिहर साहनी ने पंचकूला के मोरनी में आयोजित मोरनी हिल्स मैराथन (42 किलोमीटर) में मेडल जीता है। हरिहर के नाम और भी कई उपलब्धियां हैं। हरिहर अपनी फीटनेस पर खास ध्यान देते हैं। वह रोजाना 25 किमी दौड़ लगाते हैं।

    By Ankesh ThakurEdited By: Updated: Tue, 05 Oct 2021 04:22 PM (IST)
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    छह घंटे लगातार दौड़ सकते हैं मास्टर एथलीट हरिहर साहनी।

    विकास शर्मा, चंडीगढ़। चंडीगढ़ के हरिहर साहनी ने पंचकूला के मोरनी में आयोजित मोरनी हिल्स मैराथन (42 किलोमीटर) में मेडल जीता है। 65 प्लस आयुवर्ग कैटेगरी में दौड़ने वाले हरिहर ने बताया उनकी आय़ुवर्ग का कोई मास्टर एथलीट इस मैराथन में हिस्सा नहीं ले रहा था, बावजूद इसके उन्होंने मैराथन को समय पर पूरा किया। हरिहर इससे पहले दिल्ली में आइडीबीआइ फेडरल लाइफ इंशोरियस की तरफ से आयोजित न्यूम दिल्ली मैराथन में ब्रांज मेडल जीत चुके हैं।

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    कई मैराथन में हिस्सा ले चुके एथलीट हरिहर ने बताया कि इसी साल उन्होंने चंडीगढ़ क्लब से आयोजित पंजाब हाफ मैराथन में भी मेडल जीता था। पिछले साल 21 सितंबर को आयोजित टफमैन हाफ मैराथन में हरिहर ने ढ़ाई घंटे में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी की थी, जबकि इस हाफ मैराथन को पूरा करने का समय साढ़े तीन घंटे का था। इसके बाद उन्होंने 29 सितंबर, 2020 को कोटक महिंद्रा की हाफ मैराथन को निश्चित समय से पहले पूरा किया था।

    रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं हरिहर

    हरिहर बताते हैं कि वह रोजाना सुबह चार बजे उठकर अपनी तैयारी शुरू कर देते हैं। पहले एक घंटा वह एक्सरसाइज करते हैं और उसके बाद रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। हरिहर बताते हैं कि कई बार तो वह अपनी शरीरिक क्षमता को देखने के लिए 42 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। वह हॉफ मैराथन ढ़ाई से तीन घंटे में पूरी कर देते हैं, जबकि मैराथन छह घंटे में पूरी करते हैं।

    मास्टर ओलिंपिक में मेडल जीतना है हरिहर का सपना

    सेक्टर -7 में रहने वाले सत्तर साल के हरिहर मूल रूप से बिहार जिले के बगहा कस्बे के रहने वाले हैं। वहीं बाजार में पहले वह कपड़े की दुकान करते थे। बच्चे अच्छे से सेटल हो गए, तो उन्होंने अपना जमा जमाया बिजेनस छोड़कर मेडल जीतने का नया शौक पाल लिया। हरिहर के बड़े बेटे अमित कुमार विदेश मंत्रालय में आइइएस अधिकारी हैं, जबकि छोटे बेटे तमिलनाडु में बड़े कस्टम अधिकारी है। हरिहर बताते हैं कि अब उनके जीवन में सब कुछ ठीक है बस अब मुझे मास्टर ओलंपिक में मेडल जीतना है।