अकाली नेता मजीठिया की मुश्किल बढ़ी, करीबी हरप्रीत गुलाटी गिरफ्तार, शिमला-दिल्ली समेत कई शहरों में अवैध संपत्ति बनाई
पंजाब में अकाली नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मजीठिया के करीबी हरप्रीत गुलाटी को गिरफ्तार किया है। गुलाटी पर अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। मजीठिया के साले गजपत सिंह को भगोड़ा घोषित करने की याचिका पर भी सुनवाई होनी है। विजिलेंस ब्यूरो ने गुलाटी की भूमिका को संदिग्ध बताया है।

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पूर्व मंत्री एवं अकाली दल के नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर कसा शिकंजा।
जागरण संवाददाता, मोहाली। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व मंत्री एवं अकाली दल के नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर शिकंजा कसता जा रहा है। मजीठिया के करीबी हरप्रीत गुलाटी को भी पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है।
गुलाटी पर आरोप है कि उसकी अलग-अलग शराब कंपनियों के जरिए पैसे का लेनदेन किया गया था। इनके जरिए गुलाटी और मजीठिया ने शिमला एवं दिल्ली सहित कई शहरों में अवैध संपत्ति अर्जित की थी। रविवार को उसे अदालत में पेश कर 6 दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।
गुलाटी के वकील ने अदालत में दलील दी कि पहले विजिलेंस की तरफ से उसे सरकारी गवाह बनाया गया था। अब मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल के खिलाफ शनिवार को अदालत में दायर भगोड़ा घोषित करने की याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
गजपत सिंह के खिलाफ जारी हुए थे नान बेलेबल वाॅरंट
मोहाली अदालत की तरफ से विजिलेंस ब्यूरो की एप्लीकेशन पर बिक्रम मजीठिया के साले गजपत सिंह के खिलाफ 15 नवंबर को नाॅन बेलेबल वारंट जारी हुए थे। जिन्हें 29 नवंबर तक अदालत में वापस जमा करना था। लेकिन 29 नवंबर को यह वारंट वापस अदालत में जमा हो गए थे।
इसके बाद अदालत में विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से गजपत सिंह ग्रेवाल को भगोड़ा घोषित करने के लिए एक याचिका लगाई गई थी। जिस पर अदालत की तरफ से गजपत सिंह ग्रेवाल के वकील से जवाब मांगा गया है अगर सोमवार को अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया जाता तो भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
सरकारी गवाह को गिरफ्तार करने का आरोप
गिरफ्तार हरप्रीत गुलाटी के वकील की तरफ से अदालत में दलील दी गई की मजीठिया पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में गुलाटी को पहले सरकारी गवाह बनाया गया था। लेकिन जब उसने आम आदमी पार्टी की सरकार के अनुसार बयान नहीं दिए तो झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से दलील दी गई कि जांच के दौरान इस केस में आरोपित की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। 2007 में हरप्रीत गुलाटी और अमरप्रीत गुलाटी कार एसेसरीज का काम करते थे, लेकिन इन्होंने बिक्रम मजीठिया के साथ नजदीकियों का फायदा उठाते हुए अकाली दल की सरकार में शराब कारोबार का काम शुरू किया था। इसके जरिए इन्होंने विक्रम मजीठिया को समय-समय पर पैसे दिए गए थे।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।