LPU हिंसा पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब सरकार से पूछा- कहीं किसी ने मासूम छात्रा का इस्तेमाल तो नहीं किया?
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी हिंसा मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने सोशल मीडिया पोस्ट प्रसारित करने वाली छात्रा से पूछताछ और जांच पर सवाल उठाए।

LPU हिंसा के दौरान जेट पर चढ़ा प्रदर्शनकारी।
HighLights
हाई कोर्ट ने LPU हिंसा जांच पर पंजाब सरकार को फटकारा।
इंटरनेट मीडिया पोस्ट फैलाने वाली छात्रा की पूछताछ पर सवाल उठाए।
अदालत ने छात्रा के संभावित इस्तेमाल की जांच के निर्देश दिए।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हिंसा की घटनाओं की जांच को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर दो लड़कियों के यौन उत्पीड़न और हत्या का दावा करने वाली पोस्ट प्रसारित करने वाली 18 वर्षीय छात्रा से पुलिस की पूछताछ पर सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि छात्रा ने जानबूझकर संदेश प्रसारित किया या किसी अन्य व्यक्ति ने उसका इस्तेमाल कर यह पोस्ट फैलवाई। अदालत ने मामले की जांच को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
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मोबाइल का इस्तेमाल किसने किया, जांच जरूरी
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम वर्ष की छात्रा से उचित तरीके से पूछताछ होनी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि क्या किसी ने छात्रा के माध्यम से भ्रामक और गंभीर आरोपों वाला संदेश प्रसारित करवाया या उसके मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति ने किया।
अदालत ने कहा कि इस तरह की पोस्ट के प्रसार को हल्के में नहीं लिया जा सकता। संदेश किन परिस्थितियों में साझा किया गया, इसकी पड़ताल आवश्यक है।
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पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि छात्रा ने एक इंटरनेट मीडिया मंच के माध्यम से संदेश आगे भेजा था, लेकिन उसका कोई आपराधिक इरादा नहीं था। पुलिस की ओर से छात्रा के बयान वाली एक रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की गई।
हालांकि, खंडपीठ ने जब सीलबंद लिफाफे की जांच की तो उसमें छात्रा का बयान मौजूद नहीं मिला। इस पर अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने मामले को भोजनावकाश के बाद दोबारा विचार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
30 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
याचिकाकर्ता छात्र की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि हिंसा की घटनाओं में पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। उन्होंने कुल नुकसान करीब 30 करोड़ रुपये होने का दावा किया है।
