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अमित शाह की जालंधर रैली से दो दिन पहले LPU विवाद पर उठे सवाल, भाजपा ने बताया सोची-समझी साजिश

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:58 AM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर में रैली से पहले एलपीयू में हुए विवाद के बाद राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने साजिश का आरोप लगाया है।

LPU विवाद के बीच परिसर में हो रही तोड़फोड़।

LPU विवाद के बीच परिसर में हो रही तोड़फोड़।

HighLights

  1. भाजपा ने एलपीयू विवाद को सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया।

  2. नशा मुक्ति पंजाब यात्रा से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया गया।

  3. विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में भाजपा की ओर से चल रही नशा मुक्ति पंजाब यात्रा को मिल रहे समर्थन के बीच लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि नशे के खिलाफ उसकी यात्रा जिस तरह पंजाब में आगे बढ़ रही थी और उसे लोगों का समर्थन मिल रहा था, उससे सरकार घबरा गई है।

इसी कारण यात्रा से लोगों का ध्यान हटाने और उसके अभियान को डिरेल करने के लिए एलपीयू के विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की गई। खास बात यह है कि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बड़ी रैली भी प्रस्तावित है। ऐसे में भाजपा नेताओं ने एलपीयू घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि नशा मुक्ति पंजाब यात्रा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रही थी और पार्टी इसे नशे के खिलाफ जनअभियान के तौर पर आगे बढ़ा रही थी। इसी बीच एलपीयू में हिंसा, तोड़फोड़ और कथित तौर पर बाहरी लोगों की मौजूदगी का मामला सामने आया। भाजपा अब सवाल उठा रही है कि क्या इस घटनाक्रम का इस्तेमाल नशा मुक्ति यात्रा से लोगों का ध्यान हटाने के लिए किया गया।

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बिट्टू ने सीधे सरकार पर साधा निशाना

पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एलपीयू विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नशा मुक्ति पंजाब यात्रा को जिस तरह लोगों का समर्थन मिल रहा है, उससे सरकार परेशान है। उनके अनुसार, एलपीयू का घटनाक्रम इसी समर्थन और यात्रा से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकता है।

बिट्टू ने एलपीयू में हिंसा और तोड़फोड़ के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति बिगड़ी। बिट्टू ने पूरे मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई।

मजीठिया ने पूछा-स्टूडेंट को क्यों बनाया मोहरा

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इंटरनेट मीडिया पोस्ट के जरिये एलपीयू विवाद पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टूडेंट को राजनीतिक लड़ाई में मोहरा बनाया जा रहा है। मजीठिया ने दावा किया कि बाहरी लोग परिसर में पहुंचे और उनके पास वॉकी-टॉकी, बैट तथा अन्य सामान होने की बात सामने आई।

मजीठिया ने सवाल उठाया कि यदि बाहरी लोगों की मौजूदगी थी तो उनकी पहचान और भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई। उन्होंने मामले की जांच एनआइए या सीबीआइ से कराने की मांग की।

प्रतिपाल बलियावल ने भी उठाए सवाल

प्रतिपाल सिंह बलियावल ने एक्स पर पोस्ट कर एलपीयू घटनाक्रम को गंभीर कानून-व्यवस्था का मामला बताया। उन्होंने बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वे कौन थे, उन्हें किसने भेजा और उनका उद्देश्य क्या था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विवाद को जानबूझकर भड़काया गया।
बलियावल ने 30 सितंबर को जालंधर में अमित शाह के कार्यक्रम के संदर्भ में भी इस घटनाक्रम की जांच की बात कही।

हालांकि, एलपीयू विवाद और अमित शाह के कार्यक्रम के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एलपीयू विवाद को लेकर बेनीवाल के इंटरनेट मीडिया पोस्ट का भी राजनीतिक हलकों में जिक्र हो रहा है। इनके पोस्ट में घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इससे विवाद अब यूनिवर्सिटी परिसर से निकलकर पंजाब की राजनीतिक बहस के केंद्र में पहुंच गया है।

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सरकार ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए

विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के बीच सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह सामने आना है कि एलपीयू में विवाद की शुरुआत कैसे हुई, बाहरी लोगों की मौजूदगी थी या नहीं, हिंसा में कौन लोग शामिल थे और पुलिस की कार्रवाई किस क्रम में हुई।

भाजपा का राजनीतिक सवाल फिलहाल यही है कि जब नशा मुक्ति पंजाब यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही थी और पार्टी के मुताबिक उसे लोगों का समर्थन मिल रहा था, उसी दौरान एलपीयू विवाद क्यों सामने आया और क्या इसका इस्तेमाल भाजपा की यात्रा को डिरेल करने के लिए किया गया। इन सवालों का जवाब जांच के निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगा।

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