बीमार मां से मिलने के लिए जगातार सिंह हवारा को मिलेगी पैरोल! पंजाब राज्यपाल ने गृह मंत्रालय को भेजी सिफारिश
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल की सिफारिश की है। बीमार मां से मुलाकात के लिए मानवीय आधार पर यह कदम उठाया गया है।

जगातर सिंह हवारा और पंजाब गवर्नर गुलाब चंद कटारिया।
HighLights
राज्यपाल ने हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल की सिफारिश की।
मुख्यमंत्री मान ने बीमार मां से मिलने के लिए अपील की थी।
बेअंत सिंह के पोते बिट्टू ने भी पैरोल का समर्थन किया।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि हवारा की मां बीमार हैं और मानवीय आधार पर पैरोल का मामला आगे भेजा गया है। राज्यपाल ने यह जानकारी वीरवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
राज्यपाल का यह बयान मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से एक दिन पहले हवारा को पैरोल देने के मामले में हस्तक्षेप की अपील किए जाने के बाद आया है। मुख्यमंत्री ने मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि हवारा की बुजुर्ग और बीमार मां को 31 साल बाद अपने बेटे से मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने बताया था कि राज्यपाल ने मामले को केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।
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रवनीत बिट्टू ने भी किया समर्थन
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी मानवीय आधार पर हवारा की पैरोल का समर्थन किया है। बेअंत सिंह के पोते बिट्टू ने कहा कि बुजुर्ग और बीमार मां को बेटे के कृत्य की सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार मामले पर जल्द उचित निर्णय लेंगे।
बिट्टू ने कहा कि उनका परिवार बेअंत सिंह के बलिदान का हमेशा सम्मान करता रहेगा, लेकिन समाज को आगे बढ़ाने के लिए करुणा, मानवता और शांति का मार्ग भी जरूरी है।
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अदालत ने समयबद्ध फैसला लेने को कहा था
पिछले महीने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दिल्ली की मंडोली जेल के अधिकारियों को हवारा की पैरोल याचिका पर समयबद्ध तरीके से फैसला लेने का निर्देश दिया था। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन से सिफारिश लेने को भी कहा गया था।
हवारा को पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। वह 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इस घटना में बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी।
(इनपुट- PTI)
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