'CBI के डीएसपी ने रिश्वत लेने के लिए उकसाया', ED के अधिकारी का सनसनीखेज खुलासा; 10% कमीशन मांगने का भी आरोप
ईडी के एक अधिकारी ने सीबीआई के एक डीएसपी पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डीएसपी ने उन्हें छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपितों से रिश्वत लेने के लिए उकसाने और 10% कमीशन मांगने का आरोप लगाया। अधिकारी ने डीएसपी की रिकॉर्डिंग भी की थी लेकिन सीबीआई ने उनके घर और दफ्तर में छापा मारकर सारे सबूत जब्त कर लिए।

रवि अटवाल, चंडीगढ़। पिछले महीने सीबीआई ने शिमला ईडी के जोनल ऑफिस में रिश्वत का बड़ा मामला पकड़ा था। छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे आरोपितों ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर विशालदीप ने गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे ढाई करोड़ रिश्वत मांगी थी। इस मामले में सीबीआई ने ट्रैप लगाकर ईडी अधिकारी के भाई विकासदीप और नीरज को गिरफ्तार कर लिया था, जोकि अभी बुड़ैल जेल में हैं। वहीं, विशालदीप अभी तक फरार है।
विशालदीप की सीक्रेट शिकायत में सामने आई ये बात
वहीं, ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर विशालदीप की एक सीक्रेट शिकायत सामने आई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है और ये साजिश छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई के एक जांच अधिकारी ने रची थी, जोकि डीएसपी रैंक के थे।
वे तो आरोपितों को गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन सीबीआई के डीएसपी ने उन्हें रिश्वत लेने के लिए उकसाया। वे आरोपितों को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें रिश्वत लेने के लिए कह रहे थे और उसमें से अपने लिए 10 प्रतिशत कमीशन भी मांग रहे थे।
उन्हें जब शक हुआ, तो उन्होंने डीएसपी से मुलाकात की और उनकी रिकॉर्डिंग कर ली, लेकिन जब सीबीआई ने उनके घर और दफ्तर में रेड की तो उनके सारे सुबूत गायब कर दिए। विशालदीप ने इस संबंध में सीबीआई के डीएसपी के खिलाफ सीबीआई के ही डायरेक्टर व ईडी के डायरेक्टर को शिकायत भेजी है।
शिकायत में उन्होंने अपने घर, ऑफिस और उन सभी जगह की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने की मांग की है, जहां पर भी उनकी डीएसपी से मुलाकात हुई थी। उन्होंने डीएसपी के मोबाइल को भी सीज करने की मांग की है।
शिमला, मोहाली और चंडीगढ़ में डीएसपी से हुई मुलाकात
विशालदीप ने बताया कि नवंबर 2023 को शिमला ईडी में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर-2 नियुक्त हुए थे। उनके पास हिमाचल प्रदेश के चर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच थी। इस मामले में सीबीआई के एक डीएसपी ने उन्हें मिलने के लिए संपर्क किया।
पहले तो उन्हें लगा कि वे जांच में सहयोग करेंगे, लेकिन मिलकर पता चला कि वे तो आरोपितों से मिले हुए थे। पहले तो उन्होंने डीएसपी से मिलने से मना कर दिया, तो उन्होंने धमकी देनी शुरू कर दी। इस बारे में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बता दिया। वे सबसे पहले अक्टूबर 2024 को डीएसपी से शिमला के माल रोड पर मिले।
फिर वे मोहाली और चंडीगढ़ के एक होटल में मिले। इस मीटिंग में डीएसपी के साथ छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपित रजनीश बंसल भी थे। यहां उन्होंने विशालदीप को रिश्वत ऑफर की। उन्होंने चुपके से उनकी रिकॉर्डिंग कर ली, जिसे बाद में उन्होंने पेन ड्राइव में डाल दिया। पेन ड्राइव उन्होंने अपने घर सुरक्षित रख दी।
उन्होंने इस मुलाकात की एक फाइल बनाकर अपने ऑफिस में रख ली। इस मीटिंग के बाद उन्होंने डीएसपी और अन्य आरोपितों का पर्दाफाश करने के लिए जांच शुरू कर दी, लेकिन इस दौरान उन्हें फंसा दिया गया। सीबीआई ने उनके घर और आफिस में सर्च की और उनके सारे सुबूत को भी जब्त कर लिया गया है।
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विशालदीप को सीबीआई ने भेजा था नोटिस
सीबीआइ ने एक जनवरी को विशालदीप को नोटिस भेजा था और छह जनवरी को सेक्टर-30 स्थित सीबीआइ कार्यालय में पेश होने के लिए कहा था। हालांकि वे पेश नहीं हुए। ये मामला सामने आने के बाद उन्हें दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने वहां भी अभी तक ज्वाइन नहीं किया है। वहीं, सीबीआई उन्हे ढूंढने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और उनके जान-पहचान और परिवार से भी पूछताछ की जा रही है।
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