662 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब के बाजवा डेवलपर्स के CMD को झटका, हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने घर खरीदारों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग मामले में बाजवा डेवलपर्स ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
बाजवा डेवलपर्स सीएमडी जरनैल सिंह बाजवा की जमानत याचिका खारिज।
662 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झटका लगा।
घर खरीदारों के पैसे के दुरुपयोग का आरोप ईडी ने लगाया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारी और बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह बाजवा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज मनी लांड्रिंग मामले में आरोप है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए घर खरीदारों से प्राप्त रकम का कथित तौर पर दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल और धन का हस्तांतरण किया गया।
जस्टिस मनीषा बत्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मौजूदा स्तर पर ऐसा आधार नहीं है जिससे यह माना जा सके कि आरोपित अपराध में याचिकाकर्ता दोषी नहीं है।मामला मोहाली और आसपास बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड की परियोजनाओं, विशेष रूप से सनी एन्क्लेव, से जुड़ा है। आदेश के अनुसार वर्ष 2017 से खरीदारों की शिकायतों पर कई एफआइआर दर्ज हुई थीं।
इनमें बिक्री विलेख का निष्पादन न करना या देरी, कब्जा न देना, प्लाट नंबर बदलना और एक ही संपत्ति को एक से अधिक खरीदारों को बेचने जैसे आरोप लगाए गए थे। ईडी के अनुसार जांच के दौरान ऐसी 45 एफआइआर सामने आईं, जिनके आधार पर अपराध की आय का पता लगाने के लिए ईसीआईआर दर्ज की गई।
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तलाशी के बाद खाते फ्रीज
हाई कोर्ट के आदेश में दर्ज तथ्यों के मुताबिक मई 2025 में बाजवा और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई। इस दौरान याचिकाकर्ता, उसके परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं के कई बैंक खातों में करीब 3.31 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की गई। करीब 42 लाख रुपये नकद मिलने के अलावा रेंज रोवर, बीएमडब्ल्यू, लैंड क्रूजर, पोर्श और अन्य वाहनों की कुल करीब 1.07 करोड़ रुपये की कीमत बताई गई। ईडी ने दस्तावेजों के आधार पर धन के कथित हस्तांतरण और परत-दर-परत लेनदेन की जांच की।
ईडी ने अपराध की आय 662.49 करोड़ रुपये बताई
जांच के दौरान ईडी ने बाजवा डेवलपर्स के वर्ष 2019-20 के वित्तीय विवरण और विभिन्न व्यक्तियों के बयानों के आधार पर अपराध की आय करीब 662.49 करोड़ रुपये आंकी। ईडी का आरोप था कि घर खरीदारों से प्राप्त रकम को परियोजनाओं के बजाय जमीन खरीद, संबंधित संस्थाओं को असुरक्षित ऋण, पारिवारिक कंपनियों और अन्य निजी जरूरतों में लगाया गया।
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कोर्ट ने माना, पीएमएलए की जमानत शर्तें पूरी नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत देने के लिए अदालत को यह संतुष्टि होनी चाहिए कि आरोपित अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए वह कोई अपराध नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में फिलहाल ऐसी उचित आधार वाली संतुष्टि नहीं बनती।
साथ ही, धारा 24 के तहत अपराध की आय से संबंधित वैधानिक धारणा का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ एफआइआर बाद में रद या समझौते के आधार पर समाप्त हुई हों, फिर भी कई अनुसूचित अपराधों से जुड़ी एफआइआर लंबित हैं।
इसलिए इस स्तर पर उन मामलों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। याचिकाकर्ता 28 अक्टूबर 2025 से इस मामले में हिरासत में है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल हिरासत की अवधि जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है।
