सांसद-विधायकों के पेंडिंग केस पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सख्त, अटके मामलों की फाइलों का अब होगा कलर कोड
हाई कोर्ट ने नेताओं के खिलाफ वर्षों से पेंडिंग मुकदमों को तेजी से निपटाने के लिए मुकदमों की रंग-कोड (कलर-कोड) व्यवस्था को और स्पष्ट करने का आदेश दिया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
सांसद-विधायकों के आपराधिक मामलों की सुनवाई 2026 तक स्थगित।
केंद्रीय एजेंसियों को मामलों का पूरा ब्योरा देने का निर्देश।
लंबित मामलों की पहचान को रंग-कोड व्यवस्था स्पष्ट करने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी को और प्रभावी बनाने के मामले में सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले से संबंधित कुछ हलफनामे अभी दाखिल होना बाकी हैं। इसके चलते मामले को अब सात अक्टूबर 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से यह बताए जाने पर कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और आयकर विभाग की ओर से चलाए जा रहे कई मामलों का पूरा ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं है, हाई कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसियों से इसकी जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने को कहा हुआ है। साथ ही, लंबे समय से लंबित मामलों को तुरंत पहचानने के लिए मामलों के रंग-कोड की व्यवस्था को और स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछली सुनवाई पर चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने बताया कि सांसदों और विधायकों से संबंधित कई मामलों में ईडी, सीबीआइ और आयकर विभाग की ओर से अभियोजन चल रहा है, लेकिन इनका पूरा विवरण राज्य सरकार के पास तत्काल उपलब्ध नहीं है।
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जांच एजेंसियों को पहले रिकॉर्ड रखने के आदेश
इस पर हाई कोर्ट ने केंद्रीय संबंधित विभागों और एजेंसियों से जानकारी एकत्र कर अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर रखने को कहा था । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों में कोई अंतर सामने आता है तो संबंधित अधिकारी उसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
हाई कोर्ट के स्वत संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई शुरू की है। अदालत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की प्रगति की निगरानी कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के लंबित आपराधिक मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दे चुका है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर रोक लगी हुई है।
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अब रंग बताएगा केस कितना पुराना
खंडपीठ ने रजिस्ट्री की ओर से तैयार सांसद-विधायकों से जुड़े लंबित मामलों की रंग-कोड वाली सूची भी देखी। इसमें उन मामलों की अलग श्रेणी बनाई गई है, जिनकी कार्यवाही हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रुकी हुई है।
अदालत ने कहा कि जो मामले लंबे समय से लंबित हैं, उन्हें अधिक स्पष्ट और उभरते हुए रंग में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि पहली नजर में ही पता चल सके कि इन मामलों पर प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है।
