बर्खास्त AIG राजजीत ने जिसे बार-बार दिलाई पसंदीदा पोस्टिंग, उस इंस्पेक्टर पर नशा तस्करी और वसूली के हैं आरोप
बर्खास्त अधिकारी राजजीत सिंह पर कार्रवाई से जुड़े मामले में इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की तैनातियों, पदोन्नति और कथित नशा तस्करी ...और पढ़ें

बर्खास्त AIG राजजीत सिंह।
HighLights
AIG राज जीत सिंह पर ड्रग तस्करी नेटवर्क को संरक्षण देने का आरोप।
इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को पसंदीदा पोस्टिंग दिलवाने में निभाई अहम भूमिका।
SIT रिपोर्ट में आय से अधिक संपत्ति की जांच की सिफारिश।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राज जीत सिंह पर ड्रग तस्करी से जुड़े नेटवर्क को संरक्षण देने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जड़ें कई साल पुरानी जांच में मिलती हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजजीत सिंह को सेवा से बर्खास्त करने की घोषणा की थी।
साथ ही उनकी संपत्तियों और नशे के पैसे से अर्जित संभावित संपत्ति की जांच के निर्देश दिए गए थे। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में बंद लिफाफे में रखी गई विशेष जांच दल (एसआइटी) की रिपोर्ट खुलने के बाद हुई थी।
राज जीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का प्रमुख आधार इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़ी SIT जांच थी। इंद्रजीत सिंह को जनवरी 2017 में राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार किया था। उसके कपूरथला स्थित आवास से करीब चार किलो हेरोइन, एक एके-47 और 16 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी।
बाद में उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। एसआइटी की रिपोर्ट के अनुसार, राजजीत सिंह ने कथित तौर पर इंद्रजीत सिंह को उन जिलों में तैनाती दिलाने में भूमिका निभाई, जहां वह खुद पुलिस प्रमुख के पद पर तैनात थे। रिपोर्ट में बताया गया कि तरनतारन में तैनाती के दौरान राजजीत ने पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर इंद्रजीत की तत्काल तैनाती की मांग की थी।
इसी तरह अगस्त 2014 में होशियारपुर के एसएसपी बनने के बाद भी राजजीत ने पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर इंद्रजीत को मेहनती और जांच में दक्ष अधिकारी बताते हुए होशियारपुर में तैनात करने की सिफारिश की थी।
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कई मामलों के बावजूद दिलाई पदोन्नति
एसआइटी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इंद्रजीत सिंह के खिलाफ कई एफआइआर और विभागीय जांच लंबित होने के बावजूद उसे पदोन्नति और महत्वपूर्ण तैनातियां दिलाने में मदद की गई। जांच में इंद्रजीत पर ड्रग तस्करों के साथ मिलकर काम करने के आरोपों के अलावा लोगों पर कथित रूप से नशीला पदार्थ डालकर उन्हें फंसाने और फिर राहत दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने के आरोप भी दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इंद्रजीत कथित तौर पर ड्रग मामलों में लोगों को फंसाता था और बाद में डिस्चार्ज, जमानत या बरी कराने के नाम पर वसूली करता था।
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संपत्तियों में अचानक बढ़ोतरी पर सवाल
एसआइटी ने राजजीत सिंह और उनके परिवार की संपत्तियों की भी जांच की। रिपोर्ट में करोड़ों रुपये की कई अचल संपत्तियों का उल्लेख किया गया। इनमें आवासीय और कृषि भूमि के प्लाटों की खरीद-बिक्री शामिल थी।
एसआइटी ने वर्ष 2013 के बाद राजजीत और उनके परिवार की संपत्तियों में अचानक बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए आय के स्रोतों की आगे जांच की जरूरत बताई। रिपोर्ट में संपत्तियों की खरीद-बिक्री में कथित नकद लेन-देन और कुछ लोगों से मिले ऋण व उपहारों का भी उल्लेख किया गया।
राजजीत ने इन लेन-देन की विभाग को जानकारी दी थी, लेकिन एसआइटी ने संबंधित लोगों की आर्थिक क्षमता और इन लेन-देन की वास्तविकता की जांच जरूरी बताई थी।
हाई कोर्ट तक पहुंचा था मामला
नवंबर 2017 में वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में नशे के खिलाफ चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान इंद्रजीत सिंह की बर्खास्तगी और राजजीत सिंह की कथित भूमिका का मुद्दा उठाया था।
हाई कोर्ट ने मामले की जांच के लिए 1986 बैच के आइपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की। एसआइटी ने 2018 में हाई कोर्ट को राजजीत सिंह से संबंधित तीन विस्तृत रिपोर्ट सौंपीं। ये रिपोर्ट लंबे समय तक सीलबंद लिफाफे में रहीं।
मार्च 2023 में हाई कोर्ट ने इन रिपोर्टों को खोलने और उनके आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजजीत सिंह को बर्खास्त करने और उनकी संपत्तियों की जांच के आदेश की घोषणा की थी।
इंद्रजीत के इर्दगिर्द घूमती राजजीत सिंह की कहानी:
बर्खास्तगी: एसआइटी (SIT) रिपोर्ट खुलने के बाद राजजीत सिंह बर्खास्त।
पसंदीदा पोस्टिंग: राजजीत ने आरोपी इंस्पेक्टर इंद्रजीत को कई जिलों में तैनात करवाया।
बरामदगी: इंद्रजीत के घर से 4 किलो हेरोइन, एके-47 और 16 लाख कैश मिला था।
वसूली का खेल: लोगों पर खुद ड्रग्स डालकर फंसाया जाता और छूटने के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे।
अवैध संपत्ति: 2013 के बाद राजजीत और उनके परिवार की संपत्तियों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई।
