DA- DR भुगतान न करने पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख, पंजाब के मुख्य सचिव को कोर्ट में हाजिरी के निर्देश
कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया डीए-डीआर का भुगतान न करने और आदेश की अवहेलना पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
डीए-डीआर भुगतान में देरी पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख।
मुख्य सचिव को आदेशों के अनुपालन न होने पर कोर्ट में तलब।
दो सप्ताह में भुगतान न करने पर 6% ब्याज का आदेश।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं होने पर पंजाब के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि 3 अगस्त के आदेश के बावजूद मुख्य सचिव की ओर से अनुपालन शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया है। हालांकि, यदि राज्य को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में कोई संरक्षण मिल जाता है तो व्यक्तिगत पेशी से छूट रहेगी।
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अपील का अधिकार, आदेश की पालन भी जरूरी
खंडपीठ पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड से जुड़े लंबित डीए-डीआर भुगतान को लेकर दाखिल आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि पक्षों के बीच किसी तरह का समझौता हो गया है, जबकि उनका उद्देश्य केवल हाई कोर्ट के आदेश को लागू करवाना है।
हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपने फैसले के खिलाफ अपील करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए। कार्यवाही को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
3 अगस्त को दिए थे भुगतान के निर्देश
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने तीन अगस्त को पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को सभी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए-डीआर की अद्यतन किस्तें अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को दिए जा रहे केंद्रीय दर के अनुरूप जारी करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने भुगतान के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की थी। समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश था। साथ ही मुख्य सचिव को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया था।
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अपील दायर, रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर नहीं कीं
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य ने एक सितंबर को अपील दायर की थी, लेकिन रजिस्ट्री की ओर से बताई गई खामियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। राज्य सरकार ने अदालत से दो सप्ताह का और समय मांगते हुए कहा कि वह मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रही है।
खंडपीठ ने कहा कि सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के हित से जुड़े मामले में राज्य से अपेक्षा थी कि वह उपलब्ध कानूनी उपायों का तेजी से इस्तेमाल करता। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि एकल पीठ ने बकाया जारी करने के लिए पहले ही तीन महीने का समय दिया था और वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है।
विज्ञापनों पर भी याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रकाशित पूर्ण पृष्ठ के विज्ञापनों का भी अदालत के समक्ष उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन विज्ञापनों की प्रकृति ऐसी थी जिसे वे अदालत के आदेश के विपरीत खर्च मानते हैं। 3 अगस्त के आदेश में हाई कोर्ट ने पहले ही कहा था कि बकाया राशि का भुगतान होने तक राज्य को बड़े पैमाने पर प्रिंट या सामाजिक माध्यमों पर ऐसे अनुत्पादक विज्ञापन खर्च से बचना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं हुआ और मुख्य सचिव ने अनुपालन शपथपत्र भी दाखिल नहीं किया। इसी आधार पर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
