शोषण पीड़िता की गर्भसमापन याचिका पर अदालत सख्त, मेडिकल बोर्ड करेगा अंतिम फैसला
उच्च न्यायालय ने शोषण पीड़िता के गर्भ समापन मामले में मेडिकल बोर्ड को अंतिम निर्णय का अधिकार दिया है। 24 ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की गर्भ समापन याचिका सुनी।
मेडिकल बोर्ड करेगा गर्भ समापन पर अंतिम फैसला।
पीड़िता के स्वास्थ्य और गरिमा को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक छात्रा व दुष्कर्म पीड़िता की गर्भ समापन याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय मेडिकल बोर्ड करेगा और यदि गर्भ समापन अपरिहार्य पाया जाता है तो नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति जस्टिस जगमोहन बंसल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका पर पारित किया। याचिका में पीड़िता ने 22 सप्ताह के गर्भ को सुरक्षित रूप से समाप्त कराने और इसके लिए सरकारी मान्यता प्राप्त अस्पताल में मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की थी।
मामले के अनुसार, पीड़िता एक युवा छात्रा है, जिसने आरोप लगाया कि उसे एक व्यक्ति ने इंटरनेट मीडिया के जरिए संपर्क कर अगवा कर लिया और 4 अगस्त 2025 से लगातार प्रताड़ित किया।
आरोप है कि उसे अवैध रूप से बंधक बनाकर बार-बार दुष्कर्म किया गया और 7 अगस्त 2025 को तरनतारन जिले के गुरुद्वारा छाऊनी साहिब में जबरन शादी भी करवाई गई। इस संबंध में पीड़िता के पिता की शिकायत पर 11 अगस्त 2025 को मामला दर्ज किया गया था।
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वर्तमान में 22 सप्ताह की गर्भवती है पीड़िता
याचिका में कहा गया कि लगातार यौन शोषण के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई और वर्तमान में गर्भावस्था 22 सप्ताह की है, जिससे उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसलिए उसे सुरक्षित गर्भसमापन की अनुमति दी जाए।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो चुकी है। ऐसे में पराविधान के तहत सामान्य परिस्थितियों में गर्भ समापन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हालांकि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मोहाली को निर्देशित किया जाएगा कि वह मेडिकल बोर्ड के माध्यम से मामले की जांच करें और यदि यह पाया जाता है कि गर्भ समापन आवश्यक है, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सेहत के आधार पर मेडिकल बोर्ड करेगा फैसला
इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने राज्य के इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के संवेदनशील मामलों में कानून के प्रावधानों के साथ-साथ पीड़िता के स्वास्थ्य और गरिमा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि गर्भ समापन किया जा सकता है या नहीं।
