गमाडा की नीलामी साइटों के 100 करोड़ घोटाले में ED की कार्रवाई, पंजाब और दिल्ली-NCR में 26 ठिकानों पर छापेमारी
सरकारी खजाने को 100 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में 26 ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

ED कार्रवाई के दौरान बाहर तैनात सुरक्षा बल।
HighLights
ईडी ने गमाडा नीलामी घोटाले में 26 ठिकानों पर छापेमारी की।
कंपनियों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित लाभ मिला।
गमाडा कार्यालय और पंजाब शहरी विकास विभाग का भी सर्वे।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की। ईडी की टीमों ने दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में कुल 26 परिसरों में तलाशी और सर्वे शुरू किए हैं। कार्रवाई कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों व व्यक्तियों के परिसरों पर की जा रही है।
जांच का एक अहम पहलू ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की दो प्रमुख नीलामी साइटों से जुड़ा है, जहां कंपनियों को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लाभ पहुंचने और सरकारी खजाने को नुकसान होने की आशंका है।
ईडी के अनुसार कार्रवाई के दायरे में तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अलावा रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े परिसर शामिल हैं। एजेंसी इन कंपनियों के बीच संबंधों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
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गमाडा और विभाग में भी सर्वे
ईडी ने गमाडा के कार्यालय के साथ-साथ पंजाब सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के कार्यालय में भी पीएमएलए की धारा 16 के तहत सर्वे शुरू किया है। इसका उद्देश्य आरोपित कंपनियों से गमाडा के साथ हुए लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों से साक्ष्य जुटाना है। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि नीलामी वाली साइटों के संबंध में कंपनियों को किस प्रक्रिया के तहत वित्तीय राहत मिली और इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं।
दो प्रमुख साइटों और बकाया में राहत की जांच
ईडी की जांच के अनुसार तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) और एमबी इंफ्राबिल्ड जैसी कंपनियों को भी नियंत्रित करते हैं। इन कंपनियों ने गमाडा से मोहाली में दो प्रमुख नीलामी साइटें हासिल की थीं। इसके बाद इन कंपनियों को गमाडा को देय बकाया राशि में पर्याप्त वित्तीय राहत मिलने की बात सामने आई है। ईडी को आशंका है कि इस प्रक्रिया से कंपनियों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित लाभ और सरकारी खजाने को इतनी ही राशि का नुकसान हुआ।
कंसल्टेंसी कंपनी भी जांच के घेरे में
ईडी की कार्रवाई में टिला कंसल्टेंट्स एंड कांट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। यह कंपनी गमाडा के विभिन्न परामर्श कार्यों से जुड़ी रही है। ईडी को संदेह है कि कंपनी ने पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई हो सकती है। एजेंसी तलाशी और सर्वे के दौरान दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है।
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रेडिसन ब्लू प्रोजेक्ट के 290 करोड़ के बैंक फ्राड से भी जुड़ी कंपनी
टिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सीबीआई और ईडी के मामलों में भी आरोपित है। यह मामला नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल परियोजना से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपये के बैंक फ्राड का है। अब गमाडा से जुड़े मामले में ईडी द्वारा की जा रही कार्रवाई में कंपनियों के आपसी नियंत्रण, लेनदेन और वित्तीय लाभ की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
