ओलिंपिक में भारत से साइकिलिग में करे कोई प्रतिनिधित्व, यही है सपना : चैतन्य
ओलिंपिक में भारत से दौड़ से लेकर कुश्ती और विभिन्न खेलों के खिलाड़ी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं तो साइकिलिग से क्यों नहीं।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़ : ओलिंपिक में भारत से दौड़ से लेकर कुश्ती और विभिन्न खेलों के खिलाड़ी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं तो साइकिलिग से क्यों नहीं। साइकिलिग ऐसा माध्यम है जो कि इंसान को स्वस्थ रखने के साथ-साथ रोमांच से भर देता है। यह कहना है विश्व के आठ देशों का साइकिल पर ही भ्रमण कर चुके आयरन मैन चैतन्य वलहल का।
मूलरूप से पुणे के रहने वाले चैतन्य इन दिनों शहर के युवाओं को साइकिलिग के टिप्स देने के लिए पहुंचे हुए हैं। चैतन्य ने बताया कि साइकिलिग का शौक बचपन से था, लेकिन उस समय सही मार्गदर्शन न मिलने के चलते इस कार्य को बचपन से न कर सका। उसके बाद पढ़ाई करने के लिए आस्ट्रेलिया गया जहां पर साइकिलिग का मौका भी मिला और उससे लुत्फ भी उठाया। वापस भारत आकर यूनिवर्सिटी में टीचिग का काम भी किया, लेकिन बाद में शौक के लिए पढ़ाई को छोड़कर साइकिलिग को अपना लिया और तीन बार आयरन मैन का खिताब हासिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि मेरा सपना है कि भारत से भी साइकिलिग का कोई प्रतिनिधित्व करे, ताकि देश का नाम इससे भी विश्व स्तर पर पहुंच सके। क्या है आयरन मैन का उपाधि
आयरन मैन की उपाधि पाने के लिए व्यक्ति को 3.86 किलोमीटर की तैराकी, 180 किलोमीटर की साइकिलिग और 42 किलोमीटर की दौड़ एक साथ पूरी करनी होती है। इसके बाद आयरन मैन की उपाधि मिलती है। चैतन्य ने यह उपाधि तीन बार हासिल की है। आठ देशों का भ्रमण किया साइकिल पर
चैतन्य ने खुद के शौक को पूरा करने के लिए अब तक अमेरिका, आस्ट्रेलिया, स्वीडन, स्विटजरलैंड, जापान सहित आठ देशों का साइकिल पर भ्रमण किया है। चैतन्य बताते हैं कि साइकिलिग सिर्फ जुनून नहीं बल्कि यह इंसान की जरूरत होनी चाहिए। इससे इंसान खुद को फिट रखने के साथ पर्यावरण को भी प्रदूषण से बचा सकता है। इसलिए मैं अब ज्यादा से ज्यादा युवाओं को साइकिलिग के टिप्स देता हूं।
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