पंजाब में 1984 के दंगों पर सियासी संग्राम, संगरूर से राहुल गांधी भरेंगे हुंकार; BJP 'जख्म 84 दे' से करेगी घेराबंदी
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र ...और पढ़ें
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राहुल गांधी संगरूर से शुरू करेंगे रैली (जागरण ग्राफिक्स)
HighLights
राहुल गांधी संगरूर में 'इंसाफ रैली' से चुनावी अभियान शुरू करेंगे।
भाजपा चंडीगढ़ में 'जख्म 84 दे' कॉन्क्लेव से कांग्रेस को घेरेगी।
पंजाब में 2027 चुनाव से पहले 1984 मुद्दा फिर गरमाया।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी संगरूर में इंसाफ रैली के जरिये पंजाब में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे, वहीं भाजपा चंडीगढ़ में ‘जख्म 84 दे’ नाम से एक दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित कर 1984 की हिंसा, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए चली चार दशक लंबी कानूनी लड़ाई और उनके पुनर्वास का मुद्दा उठाएगी। दोनों दलों के कार्यक्रम एक ही दिन होने से पंजाब की राजनीति में 1984 को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं।
संगरूर से शुरू करेंगे रैली राहुल
राहुल गांधी की संगरूर रैली को कांग्रेस ने ‘हिसाब मांगो’ अभियान का हिस्सा बनाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में होने वाली इस रैली के जरिये कांग्रेस आम आदमी पार्टी सरकार को उसके चार साल से अधिक के कार्यकाल के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
पार्टी को रैली में एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। पंजाब कांग्रेस के नेता इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।
रैली में पंजाब के अधिकारों, किसानों की समस्याओं, युवाओं के रोजगार, कानून-व्यवस्था, नशे के मुद्दे और बेअदबी के मामलों में न्याय में देरी जैसे विषय उठाए जाने की संभावना है।
कांग्रेस नेता परगट सिंह पहले ही राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने, पुलिस और प्रशासन का मनोबल कमजोर होने तथा जनता का संस्थाओं से भरोसा उठने के आरोप लगा चुके हैं। नदी जल विवाद और पंजाब के हितों से जुड़े सवाल भी पार्टी के एजेंडे में शामिल हैं।
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बीजेपी करेगी 'जख्म 84 दे' का कॉनक्लेव
दूसरी ओर भाजपा का ‘जख्म 84 दे’ कॉन्क्लेव सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य 1984 की हिंसा से जुड़े तथ्यों को नई पीढ़ी के सामने लाना और पीड़ित परिवारों के न्याय के संघर्ष को सामने रखना बताया गया है। कार्यक्रम में पीड़ितों, प्रत्यक्षदर्शियों, कानूनी विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों और राजनीतिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत 1984 की हिंसा से संबंधित तस्वीरों की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया करेंगे।
इसके बाद उद्घाटन सत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मुख्य संबोधन देंगे। उन्होंने पीड़ितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कई कानूनी मामलों की पैरवी की थी।
प्रत्यक्षदर्शी साझा करेंगे अनुभव
कॉन्क्लेव में छह सत्र रखे गए हैं। पहले सत्र में हिंसा के प्रत्यक्षदर्शी अपने अनुभव साझा करेंगे। इसमें निरप्रीत कौर शामिल होंगी, जो सज्जन कुमार को सजा दिलाने वाले मामले में महत्वपूर्ण गवाह रही हैं। दूसरे सत्र में 1984 की हिंसा के पीछे कथित साजिश और सरकारी स्तर पर भूमिका से जुड़े सवालों पर चर्चा होगी।
इसमें सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी भी हिस्सा लेंगे, जिन्होंने हिंसा में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोया था। पूर्व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष तरलोचन सिंह ऑनलाइन जुड़ेंगे।
तीसरे प्रमुख सत्र में जांच में कथित खामियों और न्याय मिलने में हुई देरी पर चर्चा होगी। इसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल के पूर्व प्रमुख न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका और अधिवक्ता अशोक कश्यप शामिल होंगे। एक अन्य सत्र में दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों पर चर्चा होगी, जिसमें दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और एचएस फूलका भाग लेंगे।
समापन सत्र में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए भाजपा सरकारों की ओर से किए गए प्रयासों पर चर्चा होगी। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सतीश पूनिया, केवल सिंह ढिल्लों और सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल होंगे। पूरे कार्यक्रम का संचालन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह करेंगे।
इस तरह एक तरफ कांग्रेस पंजाब सरकार के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने और अपने चुनावी अभियान को धार देने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा 1984 के दंगों और पीड़ितों को न्याय के सवाल पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है। विधानसभा चुनाव से करीब चार महीने पहले दोनों कार्यक्रमों ने पंजाब में राजनीतिक मुकाबले की दिशा और मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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