चंडीगढ़ का मेयर कौन? पार्षद हाथ खड़े कर लेंगे निर्णय, क्रॉस वोटिंग-पार्षदों की खरीद-फरोख्त नहीं चलेगी, देश में पहली बार होगा ऐसा
चंडीगढ़ देश में पहली बार मतदान प्रक्रिया में बदलाव करने जा रहा है। अब पार्षद हाथ उठाकर मेयर का चुनाव करेंगे। डिप्टी और सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव भी इसी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इस नई प्रक्रिया का उद्देश्य क्रॉस वोटिंग और पार्षदों की खरीद-फरोख्त को रोकना है। इससे चुनाव में पारदर्शिता आएगी और पार्षदों की जवाबदेही तय होगी।

चंडीगढ़ नगर निगम का कार्यालय।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। पार्षद हाथ खड़े कर मेयर का चुनाव करेंगे। देशभर में यह पहल कर चंडीगढ़ जनवरी माह में एक मिशाल पेश करेगा।मेयर के साथ साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी इसी प्रक्रिया से होगा।
पहली बार क्राॅस वोटिंग और वोट की खरीद फरोख्त रोकने के लिए इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मतदान प्रक्रिया को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके लिए डीसी कार्यालय की ओर से एसओपी तैयार की जा रही है।
एसओपी में पार्षद किस तरह से वोट करेंगे इसे तय कर लिया गया है। मेयर चुनाव के लिए मतदान वैसे होगा जैसे प्रस्ताव पास करने के लिए पार्षदों से समर्थन और असमर्थन में राय मांगी जाती है। दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में एसओपी की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
एसओपी के अनुसार पहले उम्मीदवार का नाम लिया जाएगा। उम्मीदवार के पक्ष में मतदान और समर्थन करने वाले पार्षदों को हाथ खड़े करने के लिए कहा जाएगा। उसके बाद उस उम्मीदवार को मिलने वाले वोट की गिनती की जाएगी, जिसका रिकाॅर्ड भी दर्ज किया जाएगा।
उसके बाद दूसरे उम्मीदवार का नाम चुनाव अधिकारी की ओर से लिया जाएगा और उसे वोट करने वाले पार्षदों से हाथ खड़ा करवाया जाएगा। कोई तीसरा उम्मीदवार होगा तो उसके बाद उसका नाम लेकर पार्षदों को हाथ खड़कर करके वोट करने के लिए कहा जाएगा।
एक पार्षद एक ही उम्मीदवार को मतदान कर सकता है। जो पार्षद जिस उम्मीदवार के पक्ष में हाथ खड़ा करेंगे उन सभी के अलग-अलग नाम भी लिया जाएगा, ताकि अगर किसी को आपत्ति है तो वह बता दे।
जनवरी में चुनाव होना तय
साल 2023 में पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर विपक्ष के कुछ वोट अयोग्य ठहराए जाने और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन ने गुप्त के बजाय हाथ खड़े करके मतदान प्रक्रिया को लागू करने का फैसला लिया है। म्यूनिसिपल एक्ट के अनुसार हर साल जनवरी माह में ही मेयर का चुनाव होना तय है।
डीसी निशांत यादव की ओर से एसओपी के साथ साथ पीठासीन अधिकारी के नाम के साथ साथ चुनाव का शेड्यूल भी जारी किया जाएगा। हर बार किसी मनोनीत पार्षद को ही पीठासीन अधिकारी बनाया जाता है। डीसी भी मेयर चुनाव के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे।
मतदान प्रक्रिया बदलने से भाजपा का खेल बिगड़ा
इस समय नगर निगम में भाजपा के पास सबसे ज्यादा पार्षद 16 है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए 19 वोट चाहिए। पिछले दो साल से आप और कांग्रेस एक साथ मिलकर मेयर का चुनाव लड़ रही है। अगले साल भी ऐसी ही संभावना है।
चंडीगढ़ लोकसभा का चुनाव भी आप और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर लड़ा था। कांग्रेस के छह और आप के कुल 13 पार्षद है। सांसद का एक वोट भी कांग्रेस और आप गठबंधन के पास है।
इस साल भाजपा ने हरप्रीत कौर बबला को विपक्ष से क्राॅस वोटिंग करवाकर ही जीता था, लेकिन इस बार अगर कोई विपक्षी पार्षद मेयर चुनाव से पहले भाजपा में नहीं आता है तो जीत की राह भाजपा के लिए आसान नहीं होगी।

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