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    चंडीगढ़ में 114 सोसायटीज के लोगों को अनअर्जित वृद्धि के नाम पर 30 से 35 लाख देने पड़ रहे, मुख्य सचिव बोले-होगा समाधान

    By Sohan Lal Edited By: Sohan Lal
    Updated: Wed, 12 Nov 2025 12:15 PM (IST)

    चंडीगढ़ की 114 कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटीज के निवासियों को अनर्जित वृद्धि के नाम पर 30 से 35 लाख रुपये देने पड़ रहे हैं। 18 प्रतिशत जीएसटी भी गैर ...और पढ़ें

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    मुख्य सचिव के समक्ष रखी समस्या, बताया कि बहुत सी सोसायटी को कंप्लीशन सर्टिफिकेट ही नहीं मिले।

    बलवान करिवाल, चंडीगढ़। सेक्टर-48 से 51 के बीच सदर्न सेक्टरों में बसी 114 कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी में रहने वालों को अनअर्जित वृद्धि के नाम पर 30 से 35 लाख रुपये देने पड़ रहे हैं। गैर कानूनी तरीके से 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जा रहा है। कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा रहा। इस संबंध में बुधवार को सोसायटीज के प्रतिनिधि बुधवार को मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद से मिले।

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    चर्चा के बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जरूरी दिशानिर्देश दिए। साथ ही सभी लंबित मामलों को तुरंत सुलझाने के आदेश दिए। मुख्य सचिव ने साेसायटी के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जो मामले चंडीगढ़ में सुलझने वाले होंगे उन्हें यहीं निपटाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित मामलों का फॉलोअप किया जाएगा।

    एस्टेट ऑफिस और सीएचबी के बीच सोसायटियों के मसले उलझे

    चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोडल एजेंसी बना रखा है। जबकि नियमों अनुसार वह नोडल एजेंसी हो ही नहीं सकती। एस्टेट ऑफिस और सीएचबी के बीच सोसायटियों के मसले उलझे हुए हैं।

    गलत क्लाज लागू कर सीएचबी सोसायटियों से कन्वर्जन चार्ज बहुत ज्यादा वसूल कर रहा है। अनअर्जित वृद्धि की गणना भी गलत की जा रही है। पहले जो अनअर्जित वृद्धि आठ लाख रुपये लगती थी अब 35 लाख तक चुकानी पड़ रही है। बहुत सी सोसायटी को कंप्लीशन सर्टिफिकेट ही नहीं मिले हैं। जिससे वह फ्री होल्ड नहीं हो सकी हैं।

    यह मुख्य मुद्दे

    कन्वर्जन चार्जेज का विवाद : चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने गलत क्लाज लागू कर दिया, जिससे कन्वर्जन चार्ज 20 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज वसूले जा रहे हैं। सेक्रेटरी एस्टेट ने 1996 के आदेश और पुराने रिकार्ड की जांच कर निवासियों के दावे को सही माना है। लेकिन अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुए।

    अनर्जित वृद्धि की गलत गणना :एस्टेट आफिस की जगह अब यह चार्ज हाउसिंग बोर्ड वसूल रहा है और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लिया जा रहा है। जबकि हाई कोर्ट के निर्णय के अनुसार यह कोई सेवा नहीं बल्कि संपत्ति का हिस्सा है, जिस पर जीएसटी लागू नहीं होता। स्टांप ड्यूटी और कैपिटल गेन टैक्स चुकाने के बाद निवासियों पर दोहरी मार पड़ रही है।

    कंप्लीशन सर्टिफिकेट लंबित : वर्ष 2016 में आदेश जारी होने के बावजूद अब तक कई सोसाइटियों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिले हैं। प्रशासक के पूर्व सलाहकार विजय देव ने सोसायटी वासियों को यह राहत देने के आदेश किए थे। लेकिन उनके जाने के बाद आदेश लागू नहीं हुए। 2019 से सोसायटियों से दोहरी स्टांप ड्यूटी वसूली जा रही है, जबकि 1948 की ईस्ट पंजाब अधिसूचना के अनुसार सोसायटियों को इससे छूट दी गई थी।

     

    चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की गणना सोसायटियों के मामलों में गलत है। अनअर्जित वृद्धि पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला जा रहा जबकि यह कोई सेवा नहीं है। न्यायालय तक इस पर आदेश दे चुका है। सोसायटी की फाइल एस्टेट आफिस आनी चाहिए यह अधिकारी भी मानते हैं। फिर भी मामले अटके हैं। कोलेक्टर रेट 1.28 लाख की जगह 2.96 लाख के हिसाब से लगाया जा रहा है। कंपलीशन सर्टिफिकेट पर पूर्व एडवाइजर के आदेश लागू नहीं किए गए। यह मामले जल्द सुलझने चाहिए।

    -आरएस थापर, ज्वाइंट कन्वीनर, वायस आफ हाउसिंग सोसायटी, चंडीगढ़।


    सोसायटियों में अधिकतर सेवानिवृत लोग रह रहे हैं। उन्हें वृद्धावस्था में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वर्षाें बाद भी सुकून के पल नसीब नहीं हुए। परिवार में फ्लट ट्रांसफर करने पर भी अनअर्जित वृद्धि के तौर पर 30 से 35 लाख चुकाने पड़ रहे हैं। कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुए। जीएसटी बेवजह वसूल किया जा रहा है। चंडीगढ़ में संपत्ति से जुड़े मसलों को कोई हल ही नहीं करना चाहता।
    -विजय चांदला, एनएफएल एनक्लेव सोसायटी, सेक्टर-48ए

     

    उनकी सोसायटी फ्री होल्ड नहीं हुई है। बारिश से बचने के लिए फाइबर शेड लगाने पर वायलेशन नोटिस भेजे जा रहे हैं। जबकि प्रत्येक अधिकारी के घर में ऐसे शेड बने हैं। उन्हें कोई नोटिस नहीं देता। केवल आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। बेवजह जीएसटी की बडी़ दर वसूली जा रही है।
    -चिराग अग्रवाल, कार्यकारी सदस्य, लेबर ब्यूरो हाउसिंग सोसायटी, सेक्टर-49