'ए-कैटेगरी गैंगस्टर कर रहे हैं बुलेटप्रूफ वाहन का प्रयोग', हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार की लापरवाही पर जताई नाराजगी
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब में बुलेटप्रूफ वाहनों के रूपांतरण पर चिंता जताई है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है खासकर अपराधियों द्वारा बुलेटप्रूफ वाहनों के उपयोग को लेकर। अदालत ने अन्य राज्यों और केंद्र सरकार से भी इस मामले में जानकारी मांगी है। अगली सुनवाई 28 अगस्त 2025 को होगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में वाहनों को बुलेटप्रूफ में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ता कमलेश ने यह बताया कि उसका बेटा, जो कि एक ए-कैटेगरी गैंगस्टर है और जिस पर कुल 41 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 14 अभी विचाराधीन हैं, ने पंजाब में पंजीकृत एक वाहन को बिना किसी विधिक अनुमति या नियंत्रण के बुलेटप्रूफ में बदलवा लिया। कोर्ट ने इस स्थिति को आश्चर्यजनक और चिंताजनक बताया और यह माना कि इस पूरे विषय पर राज्य सरकार की लापरवाही और नीति विहीनता सामने आ रही है।
इस गंभीर विषय को देखते हुए अदालत ने पंजाब सरकार के पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत हलफनामे दाखिल करके यह स्पष्ट करें कि क्या राज्य में इस प्रकार के वाहन संशोधन को नियंत्रित करने के लिए कोई नीति, आदेश या दिशा-निर्देश मौजूद हैं। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि क्या कोई ऐसा प्रविधान है जो यह सुनिश्चित करता हो कि बुलेटप्रूफ जैसे सुरक्षात्मक उपकरण अपराधियों, आतंकवादियों या असामाजिक तत्वों के हाथों में न जाएं।
इस मामले में पंजाब के पुलिस महानिदेशक द्वारा दाखिल 6 अप्रैल 2025 के हलफनामे में भारत सरकार के गृह मंत्रालय की एक पुरानी नीति का हवाला दिया गया, जो 16 अप्रैल 2003 को जारी की गई थी। इस नीति का उद्देश्य सुरक्षात्मक उपकरणों जैसे बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, वाहन आदि के निर्माण, वितरण, बिक्री और उपयोग को नियंत्रित करना था।
इसके अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया था कि ऐसी सामग्रियां सिर्फ अधिकृत एजेंसियों या व्यक्तियों को ही उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि आतंकवादियों और अपराधियों के हाथों में न जाएं। इसके अतिरिक्त, पंजाब सरकार के मुख्य सचिव द्वारा 8 मई 2025 को दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया कि राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2025 को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य एक ऐसी व्यापक और कानूनी रूप से लागू की जा सकने वाली नीति बनाना है, जो राज्य में सुरक्षात्मक उपकरणों के निर्माण, वितरण और उपयोग को नियंत्रित कर सके।
इस समिति में गृह विभाग, सुरक्षा विभाग, खुफिया विभाग, परिवहन विभाग, उद्योग विभाग और विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों को भी समिति में सम्मिलित करने का प्रविधान रखा गया है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार इस विषय पर तब तक निष्क्रिय रही जब तक कि यह मामला न्यायालय के समक्ष नहीं आया। कोर्ट ने याचिका के दायरे को और विस्तारित करते हुए हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को भी इस मामले में पक्षकार बना लिया और दोनों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया कि वे यह स्पष्ट करें कि क्या उनके पास ऐसी कोई नीति या दिशा-निर्देश मौजूद हैं जो सुरक्षात्मक उपकरणों के निर्माण और वितरण को नियंत्रित करते हों।
साथ ही, भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भी निर्देश दिया गया कि वह यह बताए कि क्या राष्ट्रीय स्तर पर वाहनों को बुलेटप्रूफ में बदलने से संबंधित कोई विशेष नीति या विनियम मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर केंद्र सरकार की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वाहन निर्माण और परिवर्तनों से जुड़े तकनीकी और सुरक्षा मानक राष्ट्रीय स्तर पर ही तय किए जाते हैं।
कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पूर्व अपने-अपने हलफनामे दाखिल करें और इस विषय में पूरी जानकारी कोर्ट को उपलब्ध कराएं। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है।
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