सॉफ्टी खाने के लिए लड़ने का ड्रामा रचती थी नीरजा
नीरजा भनोट के जीवन पर उनके भाई 'बुक द स्माइल ऑफ करेज' ने किताब लिखी है, जिसे इसी महीेने लांच किया जाएगा।
सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़
नीरजा बचपन से ही बहुत नटखट थी। जब हम गर्मियों की छुट्टियों में दादा-दादी के पास शिमला जाते तो उस समय हमारे साथ कजन भी चल पड़ते। वहां पर जाकर हम घर की बालकॉनी में नाटक का मंचन करते थे। उसमें दादा-दादी हमारे जज हुआ करते थे। कुछ देर के बाद नीरजा अचानक से चिल्लाते हुए बोलती थी कि यह एक्ट गलत है। इस पर हम सभी भाई-बहन लड़ पड़ते थे। उस लड़ाई को शांत कराने के लिए दादा-दादी हमें घर से नीचे बने बाजार में ले जाकर सॉफ्टी खिलाते थे। असल बात यह थी कि वह लड़ाई एक्ट को लेकर नहीं बल्कि सॉफ्टी खाने के लिए होती थी, क्योंकि सभी को पता था कि लड़ाई होगी तभी सॉफ्टी खाने को मिलेगी। यह कहना है नीरजा भनोट के भाई अनीश भनोट का। रविवार को दैनिक जागरण से विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि नीरजा भनोट पर फिल्म बनने के बाद अब लोगों के प्रश्न होते है कि नीरजा बचपन में कैसी थी। वह किस प्रकार का व्यवहार भाईयों के साथ करती थी। मां-बाप की वह कैसी बेटी थी। उन्हीं सवालों के जवाब के लिए मैंने नीरजा भनोट पर 'नीरजा भनोट-द स्माइल ऑफ करेज' बुक लिखी है। यह बुक इसी महीने के तीसरे सप्ताह में लांच की जाएगी। 108 पन्नों में समाई नीरजा की सोच
अनीश ने बताया कि नीरजा के व्यवहार और उसकी सोच को 108 पन्नों में लिखा गया है। उसमें नीजरा का फ्लाइट में जाने से पहले तक का व्यवहार और तौर-तरीकों के बारे में भी बताया गया है। यह पुस्तक मुख्य तौर पर उन लोगों के लिए है जो कि नीरजा भनोट के बारे में जानना चाहते हैं। कौन है नीरजा भनोट
नीरजा भनोट का जन्म चंडीगढ़ में हुआ था। वह एक एयर होस्टेस थी। 1986 में पेन अमेरिका वर्ल्ड एयरवेज में प्लेन ने उड़ान भरी और कुछ देर बाद पता चला कि प्लेन हाईजैक हो गया है। हाईजैक के बाद प्लेन जिन्नाह इंटरनेशनल एयरपोर्ट कराची पाकिस्तान में पहुंच चुका है। इस दौरान जहाज में अंधाधुंध गोलीबारी हुई जिसमें नीरजा ने अपनी जान देकर तीन अमेरिकी बच्चों की जान बचाई थी। नीरजा की मौत से 73 यात्री सुरक्षित पाकिस्तान से निकाले गए थे। मरणोपरांत नीरजा भनोट को भारत सरकार ने अशोक चक्र से सम्मानित किया था। नीरजा के जीवन पर फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें नीरजा की भूमिका सोनम कपूर ने निभाई थी। पीयू में बनाया है नीरजा के नाम से हॉस्टल
चंडीगढ़ की बेटी होने के कारण पंजाब यूनिवर्सिटी ने हाल ही में बने गर्ल्स हॉस्टल नंबर-10 का नामकरण भी नीरजा भनोट हॉस्टल रखा है ताकि पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को भी नीरजा की शहादत की याद रहें।
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