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    सतलोक आश्रम बरवाला के प्रमुख रामपाल को बड़ी राहत, पंजाब-हरियाणा HC ने सजा पर लगाई रोक; क्या है मामला?

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 07:00 AM (IST)

    सतलोक आश्रम बरवाला के प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 2014 के एक मामले में उम्रकैद की सजा पर कोर्ट ने रोक लगा दी है जिसमें आश्रम के अंदर महिला अनुयायियों की मौत हो गई थी। कोर्ट ने रामपाल की उम्र और मेडिकल साक्ष्यों पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।

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    सतलोक आश्रम बरवाला के प्रमुख रामपाल की फाइल फोटो (जागरण)

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सतलोक आश्रम बरवाला के विवादित प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2014 में आश्रम के भीतर महिला अनुयायियों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल की सजा पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।

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    रामपाल पिछले 10 साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। हाई कोर्ट के आदेश से रामपाल को बड़ी राहत मिली है व बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता/अपीलकर्ता के खिलाफ यह आरोप जरूर है कि उन्होंने महिलाओं को आश्रम में बंद रखा था, लेकिन मेडिकल साक्ष्यों को लेकर गंभीर बहस योग्य मुद्दे मौजूद हैं।

    10 साल की काट चुका सजा

    अदालत ने यह भी माना कि रामपाल की उम्र 74 वर्ष है और वे पहले ही 10 साल 27 दिन की वास्तविक सजा काट चुके हैं। साथ ही मृतका के पति और सास ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया। ऐसे हालात में अदालत ने उनकी सजा को मुख्य अपील लंबित रहने तक निलंबित करने का आदेश दिया।

    यह आदेश जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने रामपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। रामपाल ने अक्टूबर 2018 में सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए सजा निलंबन की मांग की थी।

    उन्हें आईपीसी की धारा 343, 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया गया था। रामपाल की तरफ से उसके वकील अर्जुन श्योराण की ओर से दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और यह मामला दरअसल प्राकृतिक मौत का है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार मृतका की मौत ‘न्यूमोनिया’ से हुई थी।

    यहां तक कि मृतका के पति और सास ने भी अदालत में स्वीकार किया कि मृतका एक माह से न्यूमोनिया से पीड़ित थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि 13 अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं, इसलिए रामपाल को भी समान आधार पर राहत मिलनी चाहिए।

    'न भोजन, न रहने की सुविधा'

    वहीं, राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मृतका समेत कई महिलाओं को रामपाल के आश्रम में कैद कर रखा गया था, जहां उन्हें न तो पर्याप्त भोजन दिया जाता था और न ही रहने की सुविधा। सरकार का दावा था कि महिलाओं की मौत दम घुटने से हुई।

    फिलहाल, हाई कोर्ट ने रामपाल की शेष सजा पर रोक लगा दी है और यह आदेश मुख्य अपील के निपटारे तक लागू रहेगा। कोर्ट ने स्योर्टी बान्ड भरने व मजिस्ट्रेट के संतुष्टि पर रामपाल को रिहा करने का भी आदेश दिया अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो।

    कब, क्या हुआ था, कैसे पहुंचे जेल

    • नवंबर 2014 में हाई कोर्ट ने करौंथा प्रकरण में रामपाल को पेश होने के आदेश दिए थे।
    • पांच नवंबर, 2014 को हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम संचालक रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए
    • 10 नंवबर को पुलिस के पास रामपाल को कोर्ट में पेश करने का समय था।
    • रामपाल को समर्थकों ने अस्वस्थ बताकर पेश नहीं होने दिया था।
    • रामपाल के हाई कोर्ट में पेश नहीं होने पर सरकार और प्रशासन को फटकार लगी थी।
    •  पुलिस ने आपरेशन संवेदी शुरू किया, जोकि 10 दिन चला था।
    • 18 नवंबर, 2014 को पुलिस ने रामपाल की गिरफ्तारी के लिए आश्रम में प्रवेश करना चाहा तो समर्थकों से टकराव हुआ था।
    •  19 नवंबर तक रामपाल समर्थकों और पुलिस के बीच टकराव रहा, दोनों तरफ से कई घायल हुए थे।
    • 20 नवंबर, 2014 को रामपाल की गिरफ्तारी के बाद आश्रम खाली करवाकर पुलिस ने कब्जे में लिया।
    • 11 अक्टूबर, 2018 को हत्या के दो मुकदमों में रामपाल समेत 29 को दोषी करार दिया गया था।

    मुकदमा नंबर 430 में सजा पर फैसला

    • बरवाला थाना में 19 नवंबर, 2014 को मुकदमा नंबर 430 ललितपुर, यूपी निवासी सुरेश की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उसने आरोप लगाया था कि आठ नवंबर, 2014 को सतलोक आश्रम में 25 वर्षीय पत्नी रजनी और दादी कांसी बाई के साथ आया था।
    • 11 नवंबर को वापस घर जाने लगे तो रामपाल के कहने पर राजकपूर, राजेंद्र, महेंद्र सहित लाठियों से लैस समर्थकों व कमांडो ने रोक लिया। आश्रम में बंधक बना लिया। उन्हें बाहर जाने देने के लिए कहा तो मारपीट की गई।
    • आरोप था कि उक्त आरोपी कहते थे कि बच्चे और महिलाएं हमारी ढाल हैं। यदि मर गए तो पुलिस के सिर आरोप मढ़ देंगे। रामपाल व उसके समर्थक ईंट-पत्थर इत्यादि इकट्ठे करके छत पर चढ़े हुए थे। 18 नवंबर को प्रशासन पर पथराव कर दिया था।
    • आश्रम के गेट पर बैठे समर्थक भी चोटिल हुए थे। इस दौरान बंधक बनाकर रखी पत्नी व दादी की तबीयत बिगड़ गई थी। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कमांडो ने पत्नी व दादी को बाहर निकाल दिया था, जिन्हें पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया था। वहां सुरेश की पत्नी ने दम तोड़ दिया था।

    करौंथा विवाद के बाद बरवाला में बनाया था सतलोक आश्रम

    • पुलिस के अनुसार- सोनीपत का रहने वाला रामपाल जेई था, जिसने 1995 में रिटायरमेंट लेकर करौंथा में एक आश्रम बनाया था। चार एकड़ और जमीन मिलने पर आश्रम को विस्तार दिया था। आर्य समाज के लोगों ने आश्रम और उसका विरोध करना शुरू कर दिया था।
    • 2006 में डेरा खाली करवाने को लेकर विवाद हुआ था। आर्य समाज के लोगों से टकराव हुआ था। उस दौरान रामपाल पर धारा 302 के तहत केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तार होने पर दो साल तक जेल में रहा था। अदालत से जमानत पर रिहा होकर बरवाला आया था।
    • 2009 में दौलतपुर रोड पर एक कील्ला जमीन पर आश्रम बनाया था। इसके बाद चंडीगढ़ रोड पर साढ़े 12 एकड़ जमीन का सौदा 25 लाख रुल्ये प्रति कील्ला के हिसाब से बबीता के पिता बलजीत ने करवाया था। परंतु जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवाई थी। इसकी गिफ्ट डीड बनवाई थी।
    • दिल्ली में रजिस्टर्ड बंदी छोड़ ट्रस्ट और लुधियाना में 2012 में कबीर परमेश्वर ट्रस्ट के सदस्य सतलोक आश्रम का काम संभालने लगे थे। 2013 में आरएसएसएस का गठन किया था, जोकि कमांडो तैयार करता था।