चंडीगढ़, जागरण संवाददाता : मानव जीवन में पौधों की अहम भूमिका है। जलवायु परिवर्तन व कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव को कम करने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करना होगा। युवा शक्ति वनस्पति संरक्षण को विशेष महत्व दे। यह बात पंजाब विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. केके भूटानी ने कही। वह वीरवार को प्लांट्स एंड माइक्रोबायल डाइवर्सिटी प्रजेंट सेनेरियो थ्रेटस एंड कंजरवेशन स्टेटर्जीज विषय पर शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संतुलन अभी तक पेड़ों के कारण ही बचा हुआ है।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए पीयू के डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शनस प्रो. बीएस बराड़ ने कहा कि सुखद भविष्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सहेज कर रखना होगा। इसलिए दीर्घकालिक सोच के साथ संसाधनों का प्रयोग किया जाए। ओसमानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद के प्रोफेसर एमेरिटस सी मनोहर आचार्य का कहना था कि वाइल्ड डाइवर्सिटी का मनुष्य के जीवन में अहम योगदान है और यह वातावरण को बायो रीमेडिटेशन के जरिए स्वच्छ रखती है। सम्मेलन में प्रो. एसके भटनागर, प्रो. एनएस अत्री, प्रो. एसपी खुल्लर ने भी अपने विचार रखे। वनस्पति विज्ञान विभाग के चेयरमैन प्रो. अमरीक सिंह आहलूवालिया ने सम्मेलन में भाग लेने के लिए वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।

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