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    श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से होता है कष्टों का नाश : आचार्य

    By JagranEdited By:
    Updated: Sat, 05 Dec 2020 03:42 PM (IST)

    आचार्य रमेशानंद जी महाराज ने कथा के आखिरी दिन शुकदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई।

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    श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से होता है कष्टों का नाश : आचार्य

    संस, बठिडा : पंचवटी नगर बठिडा के निवासियों की ओर से पंचवटी नगर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के अंतिम दिन परमपूज्य स्वामी आचार्य रमेशानंद जी महाराज ने कथा के आखिरी दिन शुकदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई। श्रीमद् भागवत कथा को पूर्णता प्रदान करते हुए कथा में विभिन्न प्रसंगों श्री कृष्ण का स्वधाम गमन एवं अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति का वर्णन किया।

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    वृंदावन से पधारे स्वामी आचार्य रमेशानंद जी महाराज ने व्यास पीठ से भगवान श्री कृष्ण के स्वधाम गमन की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान जब अपनी लीला समाप्त करके अपने गोलोक धाम गए तभी से कलियुग का वास पृथ्वी पर हो गया। तक्षक नाग ने गंगा किनारे बैठे राजा परीक्षित को आकर डसा तो उनका शरीर जलकर भस्म हो गया। उन्होंने सात दिन श्रीमद् भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया। स्वामी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। इसके श्रवण करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग जाता है। उसकी सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और उसके जन्म जन्मांतर के पापों, समस्त दुखों व कष्टों का विनाश हो जाता है।

    उन्होंने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है। जब कथा को अपने दिनचर्या में शामिल करेंगे। कथा वाचक ने कहा कि व्यक्ति को अपना जीवन आनंदमय, मंगलमय बनाकर आत्मकल्याण करना चाहिए। इस तरह परीक्षित मोक्ष और कलयुग का वर्णन करते कथा व्यास ने सप्त दिवसीय भागवत कथा को विश्राम दिया। अंत में उन्होंने कहा कि हर इंसान को दीक्षा ग्रहण कर अपना गुरुअवश्य बनाना चाहिए। इसके उपरांत उपस्थित सभी भक्तों ने स्वामी जी के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया।