बाढ़ में डूबी अंतरराष्ट्रीय कब्बडी खिलाड़ी की कोठी, पिता बोले- बेटे के लिए 92 लाख में बनाया था घर
मानसा जिले के एक गांव में पहली बार बाढ़ आने से ग्रामीण परेशान हैं। अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी के पिता ने बताया कि ड्रेनेज विभाग की लापरवाही के कारण गांव में पानी भर गया। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है क्योंकि बाढ़ से 700 एकड़ फसल नष्ट हो गई है। युवाओं ने मिलकर कोठी को बचाने का प्रयास किया।

परविंदर बराड़, मानसा। गांव के अंतरराष्ट्रीय कब्बडी खिलाड़ी कुलविंदर सिंह के पिता बल्लम सिंह ने कहते कि उनका 1962 का जन्म है और उन्होंने आज तक अपने गांव को बाढ़ के पानी की चपेट में नहीं देखा।
साल 1988 के दौरान आई बाढ के दौरान सुनाम से आने वाली नीलोवाल ड्रेन के साथ 15 फीट का पटड़ी थी और उस समय जेसीबी मशीन ड्रेन की पटडी पर चलती थी और कभी गांव को ड्रेन के पानी से नुकसान नहीं हुआ था।
सरकार और ड्रेनेज विभाग की लापरवाही के चलते 15 फीट की पटड़ी अब दो से ढाई फीट रह गई है। ड्रेन में आए उफान को रोकने के लिए गामीणों ने बहुत बांध लगाए, लेकिन रात 10 बजे अचानक उसे फोन आया कि पूरे गांव को पानी ने घेर लिया है,अपने पशु बाहर निकाल ले।
इतने सुनकर वे मायूस हो गए। उन्हें इस बात का भी मलाल है कि बेटा अंतरराट्रीय खिलाड़ी होने के बावजूद उनके पास कोई सरकारी प्रतिनिधि अब तक नही पहुंचा है।
बल्लम सिंह कहते है कि बेटे द्वारा अपनी पांच साल की कड़ी मेहनत से जोड़ी गई तीन साल की एक एक पाई उसने इस कोठी पर खर्च कर दी और गांव का नाम देश विदेश में रोशन करने के लिए गांव में तैयार करवाई गई कोठी पर 92 लाख रुपये वे अपने हाथ से खर्च कर चुके है।
प्रर्यावरण की संभाल को लेकर बेटे के कहने पर वे कोठी के साथ 41 हजार के बूटे वे तीन साल में लगा चुके है। उन्होंने कहा कि कोठी को बचाने के लिए यदि गांव के युवा एक्त्र न होते तो कोठी भी शत प्रतिशत नष्ट हो जानी थी।
उसका बेटा पाकिस्तान,न्यूजीलैड,इंग्लेड से जीत चुका है और अब अमेरिका ने उसे अपनी ओर से खेलने की पेशकश दी है। गांव जलवेड़ा की 10 कोठियों के बाहर तीन से चार फीट तक पानी जमा होने के अलावा सैकड़े घरों के अलावा जावनरों का भी काफी नुकसान हो चुका है।
बचाव राहत कार्यो के लिए गांव जलवेड़ा व गोविंदपुरा के लोगों के अलावा उसके दोस्त लगे हुए है जो जेसीबी की मदद से मिट्टी के थैले भरकर इन कोठियों और घरों को बचाने में लगे हुए थे ता कि पानी उनके अंदर दाखिल न हो सके।
युवाओं ने ड्रेनेज विभाग से ड्रेन की पटड़ी के लिए छोड़े रास्ते को काटने वाले लोगों खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ड्रेन के किनारों के साथ मिट्टी लगाए ताकि इस आफत से लोगों को बचाया जा सके।
तरसेम सिंह गोविंदपुरा ने बताया कि बांध टूटने के बाद सरकार और प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा गांव निरीक्षण तक करने नहीं पहुंचा है।
बाढ़ ने गांव की 700 एकड़ धान,हरे चारे की फसल को नष्ट कर दिया है। जिसकी जलद से जलद गिरदावरी करवाकर उन्हें नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने प्रशासन से जेसीबी मशीन की मदद के अलावा खाली थैले मुहैया कराने की मांग रखी ताकि पानी से होने वाले नुकसान को बचाया जा सके।
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