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बठिंडा के लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में आग से तीन यूनिट बंद, बिजली उत्पादन घटकर 152 मेगावाट हुआ

Published: Mon, 17 Aug 2026 05:17 PM (IST)

लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट की बेल्ट में आग लगने से तीन यूनिट बंद हो गईं। उत्पादन घटकर 152 मेगावाट रह गया और नुकसान का आकलन जारी है।

थर्मल प्लांट में लगी आग।

थर्मल प्लांट में लगी आग।

HighLights

  1. बठिंडा थर्मल प्लांट में आग, तीन यूनिटें ठप हुईं।

  2. बिजली उत्पादन 920 से घटकर 152 मेगावाट रह गया।

  3. कर्मचारियों की हड़ताल से प्लांट की मुश्किलें बढ़ीं।

जागरण संवाददाता, बठिंडा। बठिंडा के लहरा मोहब्बत स्थित श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ताप विद्युत संयंत्र में बेल्ट नंबर-29 में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। रविवार रात लगी आग इतनी तेजी से फैली कि बेल्ट के साथ बिजली की केबलें और अन्य उपकरण भी इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद थर्मल प्लांट की चार में से तीन यूनिट बंद हो गईं।

इससे पहले से बढ़ी हुई बिजली की मांग के बीच राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट की कुल क्षमता करीब 920 मेगावाट है, लेकिन तीन यूनिट बंद होने के कारण फिलहाल यहां से करीब 152 मेगावाट बिजली ही पैदा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक आग से यूनिट नंबर तीन को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

इसे दोबारा चालू करने में करीब 10 से 15 दिन लगने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अधिकारियों ने अभी कोई अंतिम समय सीमा निर्धारित नहीं की है। आग लगने के बाद बेल्ट, बिजली की केबलों और अन्य उपकरणों को हुए नुकसान की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारण और कुल नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार नुकसान काफी बड़ा होने की आशंका है।

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18 दिन से हड़ताल जारी

थर्मल प्लांट की मुश्किलें ऐसे समय में बढ़ी हैं, जब करीब 1800 आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 18 दिनों से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पहले से ही प्लांट के रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ रहा है। अब बेल्ट में आग लगने से पैदा हुई तकनीकी समस्या ने प्रबंधन के सामने चुनौती और बढ़ा दी है। हड़ताल के कारण विभिन्न कार्यों के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।

सरकारी थर्मल प्लांटों से 691 मेगावाट उत्पादन

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों की कुल बिजली उत्पादन क्षमता करीब 2300 मेगावाट है, जबकि मौजूदा समय में इनसे करीब 691 मेगावाट बिजली ही पैदा हो रही है। यानी करीब 1609 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित है। लहरा मोहब्बत थर्मल की 920 मेगावाट क्षमता के मुकाबले 152 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।

वहीं रूपनगर थर्मल प्लांट की क्षमता 840 मेगावाट है और एक यूनिट बंद होने के कारण यहां करीब 258 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट की क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि वर्तमान में यहां करीब 281 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। इस तरह तीनों सरकारी थर्मल प्लांटों से कुल करीब 691 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

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कोयले का रैक खाली नहीं होने से आर्थिक बोझ

प्लांट में आग और कर्मचारियों की हड़ताल के बीच कोयले की सप्लाई भी परेशानी का कारण बन गई है। जानकारी के अनुसार लहरा मोहब्बत थर्मल के लिए कोयले का एक रैक पहुंचा हुआ है, लेकिन प्लांट में काम प्रभावित होने और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध न होने के कारण इसे समय पर खाली नहीं किया जा रहा। कर्मचारी नेताओं के अनुसार रेलवे नियमों के तहत कोयले के रैक को सात घंटे के भीतर खाली करना होता है।

इसके बाद रेलवे की ओर से प्रति घंटे 10,500 रुपये डेमरेज चार्ज वसूला जाता है। ऐसे में रैक लंबे समय तक खड़ा रहने पर पावरकॉम और थर्मल प्रबंधन पर रोजाना करीब ढाई लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसके अलावा बिजली की कमी पूरी करने के लिए महंगी दरों पर बिजली खरीदने की नौबत आने से सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

यूनिटों को जल्द चालू करना प्राथमिकता

थर्मल प्लांट के एसई कपिल देव ने बताया कि चार यूनिटों में से फिलहाल तीन बंद हैं। बेल्ट में आग लगने से केबलों और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है।

मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान की सही जानकारी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की प्राथमिकता थर्मल प्लांट की यूनिटों को जल्द से जल्द चालू करना है। साथ ही भविष्य में दोबारा आग लगने जैसी घटना न हो, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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